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उत्तर प्रदेश

खीरों में बिजली संकट: दिन में कटौती, रात की ठंड में गेहूं सींचने को मजबूर किसान

दिनांक: Wednesday, 31 December 2025 | समय: 10:06 PM | लेखक: | श्रेणी: उत्तर प्रदेश, रायबरेली

राजकुमार मिश्रा

खीरों, रायबरेली। सरकार भले ही किसानों की हितैषी होने के दावे करती रहे, लेकिन खीरों क्षेत्र की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। दिन के समय पर्याप्त विद्युत आपूर्ति न मिलने से किसान भीषण ठंड और घने कोहरे के बीच रात में गेहूं की फसल की सिंचाई करने को मजबूर हैं।

किसानों का कहना है कि दिन में कभी दो घंटे, कभी तीन घंटे-वह भी अनियमित रूप से बिजली मिलती है, जिससे सिंचाई का कार्य बाधित हो जाता है। मजबूरी में उन्हें रात के अंधेरे में खेतों का रुख करना पड़ता है, जहां कड़ाके की ठंड, असुरक्षा और स्वास्थ्य जोखिम उनकी परेशानी को और बढ़ा देते हैं।

रातभर खेतों में जागकर सिंचाई करना किसानों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ठंड के कारण बीमार पड़ने का खतरा बना रहता है, वहीं जंगली जानवरों और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। किसानों का कहना है कि यह स्थिति उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।

क्षेत्र के किसान कंधैया लाल, अंबिका प्रसाद, सियाराम, गंगाराम, रामसेवक, ललित कुमार, पप्पू, नंदलाल, हरिशंकर, श्यामलाल, चंद्र कुमार, प्रेमशंकर, रजऊ और लवलेश सहित अनेक किसानों ने मांग की है कि दिन के समय कम से कम आठ घंटे की सुचारू विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि गेहूं की सिंचाई दिन में की जा सके।

किसानों का साफ कहना है कि यदि दिन में सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध नहीं कराई गई, तो “किसान-हितैषी” होने के दावे खोखले ही साबित होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो किसानों का आक्रोश और तेज हो सकता है।

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