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संविधान, एकता और विकसित भारत पर राष्ट्रपति का संदेश

दिनांक: Sunday, 25 January 2026 | समय: 09:47 PM | लेखक: | श्रेणी: राष्ट्रीय

नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और संविधान, लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता तथा समावेशी विकास के मूल्यों को रेखांकित किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि गणतंत्र दिवस का पर्व देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य की दिशा का अवलोकन करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति और 26 जनवरी 1950 को संविधान के पूर्ण लागू होने को भारत के लोकतांत्रिक गणराज्य की आधारशिला बताया।

उन्होंने कहा कि संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्श भारत के गणतंत्र को परिभाषित करते हैं। राष्ट्रपति ने लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान का स्मरण करते हुए राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के प्रयासों को सराहा।

उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं जयंती, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती और ‘पराक्रम दिवस’ का उल्लेख करते हुए राष्ट्र-प्रेम और बलिदान की परंपरा को याद किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों, पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों, किसानों, श्रमिकों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, सफाईकर्मियों, उद्यमियों, कलाकारों और युवाओं के योगदान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय भी विश्व पटल पर भारत की छवि को गौरव प्रदान कर रहे हैं। राष्ट्रीय मतदाता दिवस का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मतदान लोकतंत्र को सशक्त बनाता है और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक सशक्त आयाम है।

उन्होंने महिला सशक्तीकरण से जुड़ी पहलों, स्वयं सहायता समूहों, खेल, विज्ञान और विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को रेखांकित किया।
राष्ट्रपति ने जनजातीय समुदायों के कल्याण, किसानों के योगदान, गरीबी उन्मूलन, युवाओं की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल भुगतान, GST, श्रम सुधार और आर्थिक विकास से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और निकट भविष्य में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, ‘LiFE’ मिशन, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषाओं में संविधान की उपलब्धता, सुशासन, Ease of Living और जनभागीदारी को राष्ट्रीय विकास के प्रमुख स्तंभ बताया।

सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई और सशस्त्र बलों की क्षमताओं का भी उल्लेख किया गया। अंत में राष्ट्रपति ने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ गणतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया और देशवासियों के सुख, शांति, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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