भागवत कथा में गूंजे श्रीकृष्ण जन्म के भजन, पं. आदित्य जी बोले-कथा श्रवण से दूर होती है जीवन की व्यथा

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पंकज तिवारी

सुबेहा, हैदरगढ़ (बाराबंकी)। सहरी इस्लामपुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास पं. श्री आदित्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म एवं वामन अवतार की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उनके प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पं. श्री आदित्य जी महाराज ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार, दुराचार और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान विष्णु धर्म की स्थापना और संतों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि धर्म और प्रेम की स्थापना का प्रतीक है।

उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि भागवत कथा सुनने का सौभाग्य जन्म-जन्मांतर के पुण्यों से प्राप्त होता है। कथा श्रवण मात्र से जीवन की अनेक व्यथाएं दूर होती हैं, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब व्यक्ति कथा में बताए गए आदर्शों को अपने जीवन में उतारे और परमार्थ के कार्यों में सहभागी बने।

कथा के दौरान पं. श्री आदित्य जी महाराज ने “गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की” तथा “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की” जैसे भजनों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण एवं वासुदेव जी की सजीव झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया।

श्रद्धालुओं ने भगवान का पूजन-अर्चन कर माखन-मिश्री का भोग लगाया। आयोजकों द्वारा भगवान के बालरूप की आरती उतारी गई तथा मिठाई, फल और पुष्प वितरण कर जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर जजमान जय करन शुक्ल, भवानी प्रसाद तिवारी, बंशीलाल त्रिपाठी, सत्यदेव शुक्ला, ज्ञानदीप तिवारी, शिव दास तिवारी, देवनाथ तिवारी, पवन पांडे, अभिजीत सिंह, श्याम बिहारी तिवारी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

भागवत कथा के इस आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। श्रद्धालुओं ने कथा को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।

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