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लखनऊ

एसीएस पार्थ सारथी सेन शर्मा का शिक्षकों से सीधा संवाद, बोले- ‘शिक्षक सर्वोपरि, शिक्षा सुधार की असली ताकत’

दिनांक: Tuesday, 23 June 2026 | समय: 06:19 PM | लेखक: | श्रेणी: लखनऊ
  • यूट्यूब लाइव सेशन में 5 लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा, मानदेय वृद्धि और 21 हजार नई भर्तियों की जानकारी, शिक्षकों से समर्पण के साथ काम करने का आह्वान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब लाइव सेशन के माध्यम से प्रदेश के लाखों शिक्षकों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का सबसे बड़ा आधार शिक्षक हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब शिक्षक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

इस लाइव संवाद में परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, शिक्षा मित्र, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के शिक्षक तथा शिक्षा विभाग से जुड़े हजारों कार्मिक शामिल हुए। अपने संबोधन में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल भवन, फर्नीचर या स्मार्ट क्लास बनाना नहीं है, बल्कि प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है। इसके लिए विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षिक वातावरण तैयार करना और बच्चों की सीखने की क्षमता को विकसित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का वास्तविक केंद्र कक्षा-कक्ष है। यहीं बच्चे का व्यक्तित्व, ज्ञान और भविष्य आकार लेता है। शासन स्तर पर कितनी भी योजनाएं बन जाएं, लेकिन जमीनी बदलाव शिक्षक के माध्यम से ही संभव है। इसलिए शिक्षा सुधार की पूरी प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि है।

पार्थ सारथी सेन शर्मा ने तीन से छह वर्ष की आयु को बच्चों के मस्तिष्क विकास का ‘गोल्डन पीरियड’ बताते हुए कहा कि इस उम्र में उचित पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और सकारात्मक वातावरण मिलने से बच्चों की सीखने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने ‘ग्राम स्तरीय टीम’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहू, एएनएम, शिक्षक और ग्राम प्रधान यदि एक टीम के रूप में कार्य करें तो ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

शिक्षकों के हितों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू की गई है। इस योजना का लाभ अब सहायक अध्यापकों के साथ-साथ शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के शिक्षकों को भी मिलेगा। उन्होंने सभी शिक्षकों से इस योजना में स्वयं और अपने परिवार का पंजीकरण कराने की अपील की।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि की है तथा लंबे समय से रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। नगरीय क्षेत्रों में करीब 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जिससे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर होगी।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षक केवल नौकरी नहीं कर रहा होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र निर्माण के पवित्र मिशन का हिस्सा होता है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने विद्यालय और विद्यार्थियों के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि निपुण भारत मिशन के तहत वर्ष 2026-27 तक प्रत्येक बच्चे को निपुण बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब शिक्षक पूरी लगन और ईमानदारी के साथ कक्षा में पढ़ाएगा।

संवाद के दौरान साहित्य और लेखन से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि नियमित अध्ययन अच्छे लेखन की पहली शर्त है। उन्होंने शिक्षकों को सलाह दी कि वे अपनी व्यस्त दिनचर्या में भी स्वयं के लिए समय निकालें, नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ें, लेखन करें तथा योग और व्यायाम के माध्यम से मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

महिला शिक्षकों की दोहरी जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि घर और विद्यालय दोनों की जिम्मेदारियों के बीच स्वयं के लिए समय निकालना बेहद जरूरी है। एक स्वस्थ, सकारात्मक और तनावमुक्त शिक्षक ही बच्चों को बेहतर शिक्षा और संस्कार दे सकता है।

अपने समापन संबोधन में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मियों को नए शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षकों की मेहनत और सकारात्मक सोच के बल पर उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था देश में नई पहचान स्थापित करेगी और प्रदेश का प्रत्येक बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को बेहतर बनाएगा।

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