रायबरेली। खीरों विकासखंड अंतर्गत ग्राम हरीपुर मिर्दहा में स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। गांव में वजीर के घर से लेकर हसीब के घर तक बनी नाली वर्षों से साफ नहीं कराई गई, जिससे आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार नाली में गंदा पानी और कचरा जमा होने से बदबू फैल रही है तथा लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाई कर्मी स्वामी प्रसाद से कई बार नाली साफ कराने की मांग की गई, लेकिन उसने साफ शब्दों में कह दिया कि “मैं नाली साफ नहीं करूंगा, जहां शिकायत करनी है कर दो।”
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान इरशाद अली पर भी पक्षपात का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि प्रधान केवल अपने चहेते लोगों के घरों के आसपास बनी नालियों की सफाई कराते हैं, जबकि अन्य मोहल्लों की नालियां वर्षों से बदहाल पड़ी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह भेदभावपूर्ण तरीके से संचालित की जा रही है।
गांव के लोगों ने सवाल उठाया कि जब सरकार “स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत” अभियान चलाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रही है, तब गांव स्तर पर इस तरह की लापरवाही आखिर किसकी जिम्मेदारी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नालियों की सफाई नहीं कराई गई, तो बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि गंदगी और जलभराव के चलते मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर ग्रामीणों में चिंता का माहौल है।
इस संबंध में जब एडीओ पंचायत कमलेश कुमार श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिली है और अगले दिन सफाई कर्मी भेजकर नाली की सफाई कराई जाएगी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक आश्वासन धरातल पर कितना उतरता है और गांव के लोगों को बदहाल सफाई व्यवस्था से कब राहत मिलती है।






