महिला कैदियों और उनके बच्चों के अधिकारों पर NHRC सख्त, राज्यों से दो महीने में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नौ केंद्रीय मंत्रालयों और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किया परामर्श; स्वास्थ्य, कानूनी सहायता, स्वच्छता और पुनर्वास पर विशेष जोर
नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने महिला कैदियों और उनके बच्चों के मानवाधिकारों के संरक्षण को लेकर एक विस्तृत परामर्श जारी किया है। आयोग ने नौ केंद्रीय मंत्रालयों, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों एवं प्रशासकों तथा पुलिस महानिदेशकों से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से परामर्श में दी गई सिफारिशों के क्रियान्वयन की प्रगति पर दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने को कहा है।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), दिल्ली की ओर से 28 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, आयोग ने महिला कैदियों और उनके साथ रहने वाले या उनसे अलग रहने वाले बच्चों की जरूरतों और अधिकारों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई है। NHRC ने कहा है कि इन संवेदनशील समूहों के साथ लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
आयोग के अनुसार, हिरासत में सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ जेलों में मानवीय परिस्थितियां उपलब्ध कराना, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, न्याय तक पहुंच, पारिवारिक संबंधों का संरक्षण, बच्चों के सर्वोत्तम हितों की सुरक्षा तथा कैदियों के पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण के लिए सार्थक अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
दस प्रमुख क्षेत्रों पर कार्रवाई की सिफारिश
NHRC के इस परामर्श में कार्रवाई के लिए दस व्यापक क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें गिरफ्तारी और कारागार प्रणाली में प्रवेश से पहले की प्रक्रिया, प्रवेश रिकॉर्ड, बच्चों से संबंधित डेटाबेस एवं दस्तावेजीकरण, स्वास्थ्य और चिकित्सा देखभाल तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा महिला कैदियों के रहने की स्थिति, स्वच्छता, कल्याण और संबंधित कर्मियों को संवेदनशील बनाने, कैदियों के साथ रहने वाले या उनसे अलग रहने वाले बच्चों की जरूरतों, संचार, मुलाकात और परिवार से संपर्क बनाए रखने जैसे विषयों पर भी ध्यान देने को कहा गया है।
परामर्श में कारागार प्रशासन, कानूनी सहायता और न्याय तक पहुंच, महिला कैदियों को अदालत में पेशी के दौरान विशेष सुविधाएं एवं कल्याणकारी उपाय उपलब्ध कराने, पुनर्वास, रिहाई के बाद सामाजिक पुनर्एकीकरण तथा विदेशी नागरिक कैदियों से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
दो महीने के भीतर मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संबंधित अधिकारियों से परामर्श में दी गई सिफारिशों को लागू करने की दिशा में कदम उठाने और दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आग्रह किया है। इसके माध्यम से आयोग को सिफारिशों के कार्यान्वयन और हुई प्रगति की जानकारी मिल सकेगी।
आयोग के इस परामर्श का उद्देश्य महिला कैदियों और उनके बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, पारिवारिक संपर्क और न्याय तक पहुंच से जुड़े पहलुओं पर संबंधित विभागों का ध्यान केंद्रित करना है।
परामर्श यहां देखें: https://nhrc.nic.in/flipbook/other_advisories/46