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उत्तर प्रदेश

उरई जालौन में जयगुरुदेव बाबा उमाकांत जी महाराज का सत्संग, नामदान, दुःख निवारण झंडा और मुक्ति का संदेश

दिनांक: Monday, 06 October 2025 | समय: 10:39 PM | लेखक: | श्रेणी: उत्तर प्रदेश

“जीते जी प्रभु प्राप्ति ही मनुष्य जीवन का उद्देश्य”- बाबा उमाकांत जी महाराज

जयगुरुदेव दुःख निवारण झंडे से मिल रहा श्रद्धालुओं को आराम और बरकत का अनुभव

शकील अहमद

उरई जालौन। अनाज मंडी मैदान में रविवार को शुरू हुए दो दिवसीय शरद पूर्णिमा सत्संग और नामदान कार्यक्रम में विश्वविख्यात बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बाबा उमाकांत जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन-मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया।

देश-विदेश से आए हजारों भक्तों की भीड़ में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरा मैदान गुलाबी वस्त्रधारी श्रद्धालुओं से भरा रहा।

जीवन का सच्चा उद्देश्य – जीते जी प्रभु प्राप्ति

सत्संग के दौरान बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा कि “यह मनुष्य शरीर किराये का मकान है। साँसों की पूंजी खत्म होते ही इसे छोड़ना पड़ता है। इसका असली उद्देश्य सिर्फ खाने-पीने या मौज-मस्ती में नहीं, बल्कि जीते जी प्रभु को पाने में है।” उन्होंने आगे कहा कि मुक्ति का मार्ग केवल जीवित गुरु ही दिखा सकते हैं। उनके आशीर्वाद से ही “शिव नेत्र” खुलता है और मनुष्य देवी-देवताओं के साक्षात दर्शन कर सकता है।

दुःख निवारण झंडे से मिल रहा आराम और तरक्की

महाराज जी ने अपने प्रवचन के दौरान बताया कि उन्होंने सत्संग स्थल पर ‘जयगुरुदेव दुःख निवारण झंडा’ लगाया है, जिसमें अनेक अदृश्य दिव्य शक्तियों को आमंत्रित किया गया है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि “जो भी इस झंडे को श्रद्धा से प्रणाम कर अपनी तकलीफ मन ही मन कह देगा, उसे अवश्य आराम मिलेगा। विश्वास के अनुसार दो आने से लेकर सोलह आने तक फायदा जरूर होगा।” श्रद्धालु इस झंडे के दर्शन और प्रणाम के लिए घंटों कतार में खड़े नजर आए।

भक्तों द्वारा स्वयं की व्यवस्था-अनुशासन की मिसाल

कार्यक्रम स्थल पर लाखों भक्तों की उपस्थिति के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह अनुशासित रही। भोजन, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा और बिजली की व्यवस्था पूरी तरह भक्तों द्वारा स्वयंसेवक रूप में की गई। बिना किसी सरकारी अनुदान, चंदा या दान के। यह स्वयंसेवा और संयम का दुर्लभ उदाहरण रहा।

कुदरत के इशारे और आने वाले संकट से सावधानी

महाराज जी ने अपने सत्संग में आने वाले समय को लेकर चेताया कि “मनुष्य के बुरे कर्मों से कुदरत नाराज़ है। नया साल लगते ही खतरे की घंटी बज सकती है। धन-संपत्ति की चिंता छोड़ दो, जान बची तो बहुत बड़ी बात होगी।” उन्होंने सभी को शाकाहारी, नशामुक्त और सदाचारी जीवन अपनाने तथा नामदान लेकर सुमिरन, ध्यान और भजन करने की सलाह दी।

भक्ति का समर्पण-  लोक और परलोक दोनों का कल्याण

सत्संग स्थल पर भक्तों ने महाराज जी का स्वागत करते हुए भक्ति गीतों के साथ आस्था व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान वातावरण “जयगुरुदेव” के उद्घोष से गूंज उठा। बाबा उमाकांत जी महाराज ने कहा कि “गुरु की कृपा से ही मनुष्य जीवन सार्थक होता है। जो जीव गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, वह दुःख से मुक्त होकर मोक्ष का अधिकारी बनता है।”

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