लखनऊ। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर देश भर में शीर्ष स्थान हासिल किया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में ग्राम्य विकास विभाग ने रोजगार सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025–26 में 2000 लाख मानव दिवस के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 1768.81 लाख मानव दिवस सृजित किए जा चुके हैं। इसी के साथ उत्तर प्रदेश मानव दिवस सृजन में देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुका है।
47.76 लाख परिवारों को मिला रोजगार
मनरेगा के माध्यम से इस वित्तीय वर्ष में अब तक 47.76 लाख ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। प्रदेश में योजना के तहत ₹6598.89 करोड़ की धनराशि खर्च की जा चुकी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी।
उपमुख्यमंत्री ने दिए निर्देश- कन्वर्जेंस से बढ़ेगा असर
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विभागीय अधिकारियों को मनरेगा अभिसरण(Convergence) के अंतर्गत कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अन्य विभागों की सहभागिता बढ़ने से ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को और प्रभावी तरीके से प्राप्त किया जा सकेगा।
उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि “मनरेगा में 90 दिन रोजगार कर चुके सभी श्रमिकों को श्रम विभाग के बीओसीडब्ल्यू बोर्ड में पंजीकृत कराया जाए ताकि वे कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ प्राप्त कर सकें।”
पलायन रोकना योजना का मुख्य उद्देश्य
राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में ग्राम्य विकास आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी ने कहा कि
ग्रामीण श्रमिकों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना मनरेगा का प्रमुख लक्ष्य है
रोजगार अवसर बढ़ाकर ग्रामीण पलायन रोका जा सकता है
मानव दिवस सृजन में कमी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं होगी
आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों और मनरेगा अधिकारियों को समयबद्ध और लक्ष्य आधारित कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मनरेगा रोजगार सृजन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि न केवल ग्रामीण विकास का सूचक है, बल्कि राज्य सरकार की ग्रामीण गरीबों के प्रति संवेदनशीलता को भी दर्शाती है। सरकार का प्रयास है कि हर गांव में रोजगार निर्मित हो और ग्रामीण परिवारों की आय में निरंतर वृद्धि हो।


















