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सौंदर्यीकरण और प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से बड़ा अभियान
डच आयातित बल्बों से सजेेंगे धार्मिक स्थल और प्रमुख पार्क
नई दिल्ली। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) 27 दिसंबर से लुटियंस दिल्ली में एक व्यापक सौंदर्यीकरण अभियान की शुरुआत करने जा रही है, जिसके तहत 2.6 लाख से अधिक ट्यूलिप बल्ब लगाए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य राजधानी के सौंदर्य को बढ़ाने के साथ-साथ हरित आवरण को मजबूत कर प्रदूषण से निपटना है।
एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने गुरुवार को इस अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष कुल 5.17 लाख आयातित डच ट्यूलिप बल्ब प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3.25 लाख एनडीएमसी और 1.92 लाख दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को मिले हैं। इसके अतिरिक्त, लोधी गार्डन स्थित ट्यूलिप हाउस में संरक्षित 15,000 बल्ब तथा सीएसआईआर–आईएचबीटी, पालमपुर से प्राप्त 20,700 बल्ब भी लगाए जाएंगे।
चहल ने बताया कि इस वर्ष के ट्यूलिप वृक्षारोपण कार्यक्रम में बिड़ला मंदिर, हनुमान मंदिर और बंगला साहिब गुरुद्वारा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को विशेष रूप से सजाया जाएगा। यहां ग्राउंड प्लांटेशन और पॉटेड अरेंजमेंट दोनों माध्यमों से रंग-बिरंगे ट्यूलिप लगाए जाएंगे।
एनडीएमसी क्षेत्र के शांति पथ, कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क, लोधी गार्डन और उपराष्ट्रपति निवास के आसपास के क्षेत्र प्रमुख रूप से इस अभियान में शामिल होंगे। इसके साथ ही सार्वजनिक उद्यानों और चौराहों पर “एक पेड़ मां के नाम”, “एक राष्ट्र, एक चुनाव” और “विकसित भारत” जैसे विषयों पर आधारित पुष्प सज्जा भी की जाएगी।
तकनीकी जानकारी साझा करते हुए चहल ने बताया कि ट्यूलिप बल्बों को अंकुरण के लिए लगभग दो महीने तक न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। भारतीय जलवायु को ध्यान में रखते हुए एनडीएमसी ने पूर्व-उपचारित और प्रोग्राम किए गए बल्बों का चयन किया है, जो तापमान में उतार-चढ़ाव के बावजूद बेहतर विकास कर सकते हैं।
फरवरी से खिलने वाले ट्यूलिप फूलों में सफेद, पीले, लाल, गुलाबी, नारंगी और बैंगनी रंग देखने को मिलेंगे। इसके अलावा, एनडीएमसी नागरिकों के लिए लगभग एक लाख पॉटेड ट्यूलिप बिक्री हेतु भी उपलब्ध कराएगी।
उल्लेखनीय है कि एनडीएमसी ने 2017-18 से भारत में सार्वजनिक ट्यूलिप वृक्षारोपण की पहल की है। व्यापक हरित प्रयासों के तहत परिषद ने अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच 3,400 से अधिक पेड़ और 29.9 लाख झाड़ियाँ लगाईं, जिनमें “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत 20 से अधिक विदेशी दूतावासों में वृक्षारोपण भी शामिल है।


















