सौरभ जायसवाल
बृजमनगंज, महराजगंज। नगर पंचायत क्षेत्र में ठंड से राहत के नाम पर अलाव व्यवस्था में लापरवाही को लेकर प्रकाशित समाचार का असर अब दिखाई देने लगा है। खबर सामने आने के बाद नगर पंचायत हरकत में आई और क्षेत्र के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर दोबारा अलाव जलवाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस बार गीली लकड़ियों के स्थान पर अपेक्षाकृत सूखी लकड़ियों की आपूर्ति कर अलाव जलवाए गए, जिससे राहगीरों और जरूरतमंदों को कुछ हद तक राहत मिली।
स्थानीय लोगों के अनुसार निष्पक्ष दर्पण चैनल पर समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर पंचायत के कर्मचारी सक्रिय नजर आए और बैरियर तिराहा टेंपो स्टैंड, बस स्टैंड, पोस्ट ऑफिस रोड, सहजनवा बाबू रोड, मस्जिद के पास और मेन रोड सहित अन्य स्थानों पर अलाव की व्यवस्था दोबारा की गई। कई जगहों पर देर शाम तक अलाव जलते हुए देखे गए, जिससे ठंड से जूझ रहे मजदूरों, रिक्शा चालकों और राहगीरों को राहत मिली।
नगर पंचायत अध्यक्ष राकेश जायसवाल ने खबर का संज्ञान लेते हुए कहा कि ठंड को देखते हुए अलाव की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी वार्डों और सार्वजनिक स्थानों पर नियमित रूप से अलाव जलाने के निर्देश दिए गए हैं और लकड़ी की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वहीं स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भले ही अलाव दोबारा जलाए गए हों, लेकिन यह व्यवस्था केवल खबर के असर तक सीमित न रहे। लोगों ने मांग की है कि पूरे शीतकाल के दौरान नियमित रूप से सुबह और शाम दोनों समय अलाव जलाए जाएं, ताकि जरूरतमंदों को स्थायी राहत मिल सके।
इस बीच नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी सुरभि मिश्रा की ओर से भी कर्मचारियों को अलाव व्यवस्था में लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, अलाव जलाने के दौरान फोटो सेशन की बजाय वास्तविक रूप से आग जलती रहे, इस पर विशेष जोर दिया गया है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि समय-समय पर ऐसी समस्याओं को उजागर किया जाना आवश्यक है, जिससे प्रशासन जिम्मेदारी के साथ कार्य करे। लोगों का कहना है कि यदि निगरानी और जवाबदेही बनी रही तो ठंड के इस मौसम में गरीब और असहाय लोगों को वास्तविक राहत मिल सकती है।
फिलहाल खबर के असर से नगर पंचायत की सक्रियता बढ़ी है। अब यह देखना अहम होगा कि यह व्यवस्था केवल कुछ दिनों तक सीमित रहती है या पूरे ठंड के मौसम में लगातार लागू की जाती है। ठंड से कांपती जनता की उम्मीदें अब प्रशासन की निरंतर कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


















