सौरभ जायसवाल
बृजमनगंज, महराजगंज। नगर क्षेत्र में घनी आबादी और मुख्य मार्गों पर संचालित शराब की दुकानों के बाहर खुलेआम शराबखोरी अब आम दृश्य बन चुकी है। नियमों को ताक पर रखकर दुकानों के आसपास ठेले, लाई-चना की दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर लोग बेखौफ शराब पीते नजर आते हैं। नशे में धुत्त लोगों द्वारा किए जाने वाले हुड़दंग से न सिर्फ राहगीर, बल्कि आसपास रहने वाले नागरिक भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
शाम ढलते ही हालात और बिगड़ जाते हैं। मुख्य मार्गों पर स्थित शराब की दुकानों के कारण महिलाओं और युवतियों का गुजरना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नशेड़ियों द्वारा छींटाकशी, फब्तियां कसना और छेड़छाड़ की घटनाएं आम हो चुकी हैं, जिससे भय का माहौल बना रहता है।
छह माह पहले भी उठा था मुद्दा, हालात जस के तस
करीब छह महीने पहले इस गंभीर समस्या को लेकर समाचार प्रकाशित किया गया था, लेकिन तब से अब तक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। आज भी लेदवा चौराहा, मामी चौराहा, लेहरा स्टेशन, बांग्ला चौराहा जैसे प्रमुख स्थानों पर शराब की दुकानों के आसपास खुलेआम जाम छलकते देखे जा सकते हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शराब दुकान के ठीक सामने या आसपास खड़े ठेलों पर बैठकर शराब पीना आम बात हो गई है, जिससे पूरा इलाका मानो “ओपन बार” में तब्दील हो गया है। कई बार शराब पीने के दौरान विवाद भी हो जाते हैं, जिससे असुरक्षा का माहौल और गहरा जाता है।
नियमों की खुलेआम अवहेलना
आबकारी नियमों के अनुसार शराब खरीदकर सार्वजनिक स्थान पर पीना दंडनीय अपराध है। साथ ही दुकानों के बाहर भीड़ जमा होना और वहीं शराब सेवन करना भी प्रतिबंधित है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। हैरानी की बात यह है कि कई दुकानों पर ठेकेदार शराब के साथ-साथ पानी की बोतलें, डिस्पोजेबल गिलास और अन्य सामग्री भी बेच रहे हैं, ताकि ग्राहकों को दुकान के बाहर ही पूरी सुविधा मिल सके।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों में आक्रोश है कि यह सब कुछ प्रशासन और आबकारी विभाग की नजरों के सामने हो रहा है, फिर भी कार्रवाई न के बराबर है। सड़क पर खड़े वाहनों और शराबियों के जमावड़े के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का निकलना दूभर हो गया है।
इस संबंध में आबकारी अधिकारी दीपेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। हालांकि स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि जब गतिविधियां खुलेआम हो रही हैं, तो क्या यह अनदेखी है या फिर किसी प्रकार की मिलीभगत? लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन अवैध गतिविधियों पर सख्ती नहीं की गई, तो कोई बड़ी अप्रिय घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसका सीधा असर शासन-प्रशासन की छवि पर पड़ेगा।


















