रायबरेली। जनपद रायबरेली के नगर पंचायत बछरावां सभागार में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय गोष्ठी एवं बीज वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात दिनेश प्रताप सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। गोष्ठी का उद्देश्य कृषकों को बागवानी, मौन पालन, मशरूम उत्पादन और पॉलीहाउस जैसी उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान उद्यान मंत्री द्वारा एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत विभिन्न कृषकों को परियोजना स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। अजय कुमार सिंह को मशरूम इकाई की स्थापना हेतु 58.22 लाख रुपये, नीरज कुमार को मशरूम उत्पादन इकाई के लिए 63.13 लाख रुपये, श्यामा सिंह, महेन्द्र बहादुर सिंह एवं रितिक शेखर को पॉलीहाउस स्थापना हेतु प्रत्येक को 28.75 लाख रुपये की परियोजना लागत के स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल 207.60 लाख रुपये की परियोजना लागत के स्वीकृति पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम की एक प्रमुख उपलब्धि यह रही कि राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के सहयोग से नगर पंचायत बछरावां में आयोजित चार दिवसीय मौन पालन प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 40 कृषकों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन प्रशिक्षित कृषकों को 5-5 मधुमक्खी छत्ते, बी-कॉलोनी तथा विभागीय योजनाओं के अंतर्गत निःशुल्क सब्जी बीज भी वितरित किए गए।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए मा. उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि रायबरेली जनपद में 972.15 लाख रुपये की लागत से निर्मित हो रहा शहद उत्कृष्टता केंद्र किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस केंद्र की स्थापना से जहां जनपद में शहद उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, वहीं कृषकों को आधुनिक प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग भी सहज रूप से उपलब्ध होगा। इससे मौन पालन के क्षेत्र में रायबरेली प्रदेश में अग्रणी भूमिका निभा सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पर-परागण के माध्यम से यह अन्य औद्यानिक एवं कृषि फसलों के उत्पादन में भी सहायक सिद्ध होता है, जिससे किसानों की समग्र आय में वृद्धि होती है। मंत्री ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी, मौन पालन और संरक्षित खेती को अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर डॉ. अजीत कुमार शासनी, निदेशक एनबीआरआई ने कृषकों को मौन पालन की आधुनिक तकनीकों, मधुमक्खी प्रबंधन एवं शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से मौन पालन करने पर कम लागत में अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है।
जिला उद्यान अधिकारी रायबरेली डॉ. जय राम वर्मा ने किसानों को अवगत कराया कि उद्यान विभाग द्वारा संचालित मौन पालन योजना के अंतर्गत 3.20 लाख रुपये की परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत अर्थात 1.28 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाता है। उन्होंने किसानों से योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक उद्यान, उप निदेशक उद्यान डॉ. सौमित कुमार बोहरा, एनबीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दयाशंकर सहित अन्य वैज्ञानिक, उद्यान विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में लगभग 350 कृषकों ने भाग लेकर योजनाओं एवं तकनीकी जानकारी का लाभ उठाया।
कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के आयोजन किसानों को नवाचार, स्वरोजगार और आयवर्धन की दिशा में प्रेरित करेंगे तथा रायबरेली को बागवानी और मौन पालन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएंगे।


















