जब खदान में फंस गईं 15 जिंदगियाँ: अंजन हिल हादसे की दर्दनाक कहानी

आर स्टीफ़न (स्टेट हेड)

छत्तीसगढ़, चिरमिरी। कुछ घटनाएँ समय के साथ पुरानी जरूर हो जाती हैं, लेकिन उनका दर्द कभी पुराना नहीं होता। छत्तीसगढ़ के चिरमिरी क्षेत्र की अंजन हिल कोयला खदान में 6 मई 2010 को हुआ हादसा भी ऐसी ही एक दर्दनाक याद है, जिसकी गूंज आज भी कई परिवारों के दिलों में जिंदा है।

उस दिन भी बाकी दिनों की तरह खदान में काम करने वाले अधिकारी, इंजीनियर और मजदूर अपने घरों से निकले थे। किसी ने बच्चों के सिर पर हाथ फेरकर घर से विदा ली थी, किसी ने पत्नी से शाम को जल्दी लौटने का वादा किया था। किसी की माँ दरवाजे तक छोड़ने आई थी। सभी की आँखों में अपने परिवार के लिए उम्मीदें थीं। उन्हें क्या पता था कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।

रोजी-रोटी की तलाश में उतरे थे धरती की गहराइयों में

कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूर हर दिन जान जोखिम में डालकर धरती की गहराइयों में उतरते हैं। अंधेरे, धूल और गैसों के बीच काम करना उनके लिए सामान्य बात होती है। अंजन हिल खदान में भी उस दिन करीब 15 अधिकारी और कर्मचारी अपने काम में जुटे हुए थे।

लेकिन अचानक खदान के अंदर हालात बदल गए। कोल डस्ट और फायर डैम्प गैस के विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाका इतना तेज था कि खदान के भीतर मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

मदद के लिए पुकारते रहे लोग

बताया जाता है कि विस्फोट के बाद खदान के अंदर धुआं और जहरीली गैस तेजी से फैलने लगी। अंदर फंसे लोग मदद के लिए पुकारते रहे। कुछ ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन अंधेरी सुरंगें और जहरीला धुआं उनके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बन गया।

बचाव दल को सूचना मिलते ही राहत कार्य शुरू किया गया, लेकिन खदान के अंदर की स्थिति बेहद कठिन थी। जब तक बचाव कार्य पूरी तरह शुरू हो पाता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

एक साथ उजड़ गए 15 परिवार

इस हादसे में जीएम ऑपरेशन एस.के. गोस्वामी समेत कई अधिकारी, इंजीनियर और माइनिंग कर्मचारी अपनी जान गंवा बैठे।

मृतकों में शामिल थे:

  1. एस.के. गोस्वामी – जीएम ऑपरेशन
  2. ए.एन. सिंह – मैनेजर
  3. आर.के. मिश्रा – मैनेजर
  4. पी.के. सिंह – इंजीनियर
  5. एस.के. पांडे – इंजीनियर
  6. आर.के. यादव – इंजीनियर
  7. ए.के. सिंह – इंजीनियर
  8. वी.के. शर्मा – इंजीनियर
  9. रामप्रसाद – माइनिंग मेट
  10. राजेंद्र कुमार – माइनिंग मेट
  11. सुरेश कुमार – माइनिंग मेट
  12. रामचंद्र – माइनिंग मेट
  13. लालचंद – माइनिंग मेट
  14. गंगाराम – माइनिंग मेट
  15. शिवकुमार – माइनिंग मेट

इन नामों के पीछे केवल कर्मचारी नहीं थे, बल्कि किसी के पिता, किसी के पति, किसी के भाई और किसी के बेटे थे।

घरों में छा गया मातम

जब हादसे की खबर खदान से बाहर पहुंची, तो पूरे इलाके में सन्नाटा छा गया। लोग अस्पतालों और खदान के बाहर जमा होने लगे। हर कोई अपने परिजन के सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठा था।

लेकिन धीरे-धीरे सच सामने आने लगा। एक-एक कर 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। उस दिन कई घरों के चूल्हे बुझ गए। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, बहनों की राखी सूनी हो गई और कई पत्नियाँ विधवा हो गईं।

हादसे के बाद क्या हुआ

यह खदान साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के चिरमिरी क्षेत्र में स्थित थी। हादसे के बाद खदान को बंद कर दिया गया और घटना की जांच के लिए एक समिति बनाई गई। जांच में पाया गया कि हादसे की वजह कोल डस्ट और फायर डैम्प गैस का विस्फोट था।

इसके बाद खदान सुरक्षा और संचालन से जुड़े नियमों को लेकर भी कई सवाल उठे। प्रशासन और कंपनी ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की बात कही।

आज भी याद किया जाता है वह दिन

चिरमिरी के लोग आज भी 6 मई 2010 को नहीं भूल पाए हैं। हर साल इस दिन खदान में जान गंवाने वाले मजदूरों और अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

यह केवल एक दुर्घटना की याद नहीं, बल्कि उन लोगों के साहस और बलिदान की कहानी है जिन्होंने अपने परिवार और देश की जरूरतों के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया।

अंजन हिल खदान की यह त्रासदी हमें याद दिलाती है कि ऊर्जा और विकास के पीछे उन मजदूरों की मेहनत और जोखिम छिपा होता है, जिनके बारे में अक्सर बहुत कम लोग सोचते हैं। उनकी यादें और उनका बलिदान हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।

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