लखनऊ । उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद को लेकर सरकार ने बड़ी तैयारी पूरी कर ली है। मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस वर्ष गेहूं की सरकारी खरीद 30 मार्च 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगी।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹160 अधिक है। इससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रदेश के सभी 75 जिलों में 6,500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए एफसीआई, खाद्य एवं रसद विभाग, मंडी परिषद, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, नेफेड, एनसीसीएफ और भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ सहित कुल 8 एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस बार सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए कृषि उत्पादक संगठन (FPO) और कंपनियों (FPC) को भी खरीद प्रक्रिया में शामिल किया है। हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं, जैसे कम से कम एक वर्ष पुराना पंजीकरण और खाते में 20 लाख रुपये की उपलब्धता।
किसानों को अतिरिक्त लाभ देने के लिए सरकार ने उतराई, छनाई और सफाई के मद में ₹20 प्रति क्विंटल अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान किया है, जिसका करीब ₹60 करोड़ खर्च मंडी परिषद वहन करेगी।
कृषि मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस वर्ष खरीद लक्ष्य को 30 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। साथ ही पूरी खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन कर पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।
उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष गेहूं की फसल अच्छी हुई है और किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराए गए थे। क्रय केंद्रों पर छाया, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा बटाईदारों और नॉमिनी के माध्यम से भी गेहूं बेचने की सुविधा दी गई है। पहले से पंजीकृत किसानों को एसएमएस के जरिए खरीद से जुड़ी जानकारी दी जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।


















