सौरभ जायसवाल
बृजमनगंज (महराजगंज)। जीरो टॉलरेंस और जीरो भ्रष्टाचार की बात करने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं पर सवाल उस समय खड़े हो गए, जब बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के तहत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाला रिफाइन तेल खुले बाजार में बिकता हुआ सामने आया।

यह वही तेल है जो आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों और महिलाओं तक पहुंचाया जाना चाहिए, लेकिन अब यह किराना दुकानों और बाजारों में बेचा जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह तेल सरकारी व्यवस्था से निकलकर बाजार तक कैसे पहुंच गया?
बताते चलें कि बृजमनगंज क्षेत्र के साप्ताहिक बाजार में एक व्यक्ति द्वारा इसी सरकारी तेल से जलेबी बनाकर बेची जा रही थी। जब कुछ युवाओं की नजर इस तेल के पैकेट पर पड़ी तो वे हैरान रह गए। जानकारी करने पर पता चला कि यह तेल बाजार में धड़ल्ले से उपलब्ध है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दुकानदारों को किसी का डर नहीं है? खुलेआम पैकेज के साथ इस तेल की बिक्री क्या यह संकेत नहीं देता कि कहीं न कहीं सिस्टम में मिलीभगत है? दुकानदार खुले तौर पर यह तेल बेच रहे हैं, मानो उन्हें किसी कार्रवाई का भय ही न हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह तेल इतनी बड़ी मात्रा में बाजार में पहुंच रहा है तो यह कोई छोटी गड़बड़ी नहीं बल्कि बड़े स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार का मामला हो सकता है।
सूत्रों के अनुसार कुछ दुकानों पर इस तेल के पैकेट फाड़कर ड्रम में भरकर भी बेचा जा रहा है, जिससे इसकी पहचान भी छिपाई जा सके। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आखिर कहां हैं? क्या उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी नहीं है या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनदेखा किया जा रहा है?
सरकार इस योजना के जरिए बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पोषण पहुंचाना चाहती है, लेकिन अगर वही सामग्री बाजार में बिक रही है तो यह योजना के उद्देश्य पर सीधा सवाल है। आखिर कौन इस तेल को आंगनबाड़ी से बाजार तक पहुंचा रहा है और इस पूरे खेल से किसे फायदा हो रहा है?
इस मामले को लेकर समाजसेवी महेश जायसवाल ने जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जो लोग जरूरतमंदों के हक पर डाका डाल रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


















