शकील अहमद
लखनऊ। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश के स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल लिटरेसी और साइबर सिक्योरिटी को पाठ्यक्रम में शामिल करने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिवोल्यूशन का है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को तेजी से बदल रहा है।
अनुमान है कि वर्ष 2030 तक एआई ग्लोबल इकोनॉमी में 15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का योगदान दे सकती है। ऐसे में छात्रों को शुरुआती स्तर से ही एआई और डिजिटल तकनीक की जानकारी देना समय की मांग है।
उन्होंने एक्सेंचर की सीईओ जूली स्वीट के बयान का हवाला देते हुए कहा कि भविष्य में नौकरी और प्रमोशन काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगे कि कर्मचारी एआई टूल्स का कितना प्रभावी उपयोग कर पाते हैं। इसलिए छात्रों को स्कूल स्तर से ही इस तकनीक से परिचित कराना जरूरी है।
“उ.प्र. एआई और डिजिटल एजुकेशन मिशन” शुरू करने का सुझाव
डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि प्रदेश में “उ.प्र. एआई और डिजिटल एजुकेशन मिशन” शुरू किया जाए। इसके तहत स्कूलों में तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने के लिए कई पहल की जा सकती हैं।
इस प्रस्ताव के अंतर्गत
-कक्षा 6 से एआई और कोडिंग की पढ़ाई शुरू करने
-स्कूलों में एआई और डिजिटल इनोवेशन लैब स्थापित करने
-आईआईटी कानपुर जैसे संस्थानों के सहयोग से शिक्षकों को प्रशिक्षण देने
-टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ इंडस्ट्री पार्टनरशिप विकसित करने जैसे सुझाव शामिल हैं।
साइबर सुरक्षा शिक्षा भी जरूरी
विधायक ने कहा कि डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ साइबर अपराध और साइबर हमलों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई साइबर घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों को साइबर सेफ्टी, डेटा प्रोटेक्शन और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के बारे में शिक्षित करना अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है।
भविष्य की नौकरियों के लिए जरूरी कदम
डॉ. राजेश्वर सिंह का कहना है कि यदि स्कूल स्तर पर एआई और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया जाता है तो इससे युवाओं को फ्यूचर जॉब्स के लिए तैयार होने, नवाचार को बढ़ावा देने और साइबर जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी और एआई हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


















