बारिश में उजड़े तीन गरीब परिवारों के आशियाने, अब बहन और रिश्तेदारों के घर रहने को मजबूर

उन्नाव के सीजनी सोहरामऊ में तीन मकान ढहने के बाद भी आवास का इंतजार, बीडीओ ने जांच का दिया आश्वासन
उन्नाव। सरकार गरीबों को पक्की छत मुहैया कराने और हर जरूरतमंद परिवार को आवास देने के दावे करती है, लेकिन विकासखंड पुरवा की ग्राम पंचायत सीजनी सोहरामऊ की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। यहां भारी बारिश ने तीन गरीब परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए।
किसी का मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया तो किसी के घर की छत हमेशा के लिए छिन गई। इसके बावजूद आरोप है कि अब तक इन परिवारों को सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है। नतीजा यह है कि अपने ही गांव में बेघर हुए ये परिवार आज दूसरों के रहमोकरम पर जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम सीजनी सोहरामऊ निवासी गीता देवी पत्नी रज्जन लाल, गुड्डू शर्मा पुत्र स्वर्गीय युधिष्ठिर और दुर्गा देई पत्नी स्वर्गीय भीमशंकर शर्मा के मकान भारी बारिश के चलते पूरी तरह ढह चुके हैं।
बारिश ने इन परिवारों से सिर्फ मकान नहीं छीना, बल्कि उनके सिर से सुरक्षित छत भी छीन ली। मकान गिरने के बाद इनके सामने रहने और परिवार का गुजर-बसर करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
इन परिवारों की बेबसी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गीता देवी को अपने ही घर में रहने के बजाय बहन के घर शरण लेनी पड़ रही है। वहीं दुर्गा देई अपनी बेटी की ससुराल में रहने को मजबूर हैं।
दूसरी ओर गुड्डू शर्मा अपने परिवार के साथ गांव छोड़कर शहर में रहकर किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। सवाल है कि जिन परिवारों के पास रहने के लिए अपना मकान तक नहीं बचा, उनकी सुध लेने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
सरकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंदों को राहत देना है, लेकिन सीजनी सोहरामऊ के इन तीन परिवारों की स्थिति व्यवस्था के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती है। जब गरीबों के लिए आवास योजनाएं संचालित हैं, तो फिर बारिश में मकान गंवा चुके इन परिवारों तक उनका लाभ क्यों नहीं पहुंचा?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को इन परिवारों की स्थिति की जानकारी नहीं है, या फिर जरूरतमंदों को योजना का लाभ दिलाने के लिए उन्हें खुद सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे?
मामले को लेकर खंड विकास अधिकारी पुरवा से बातचीत की गई तो उन्होंने जांच कराने का आश्वासन दिया। हालांकि, ग्राम पंचायत अधिकारी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक उनका फोन नहीं उठ सका।
ऐसे में ग्राम पंचायत स्तर पर इन परिवारों की स्थिति का आकलन हुआ है या नहीं और आवास योजना के लिए इनके नाम पर कोई कार्रवाई की गई है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
अब सवाल सिर्फ जांच के आश्वासन का नहीं, बल्कि कार्रवाई का है। क्या प्रशासन इन परिवारों के टूटे मकानों का स्थलीय निरीक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति दर्ज कराएगा? क्या पात्रता के आधार पर इन्हें सरकारी आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू होगी, या फिर ये परिवार इसी तरह बहन-बेटी और रिश्तेदारों के घरों में शरण लेकर सरकारी मदद का इंतजार करते रहेंगे?
प्रशासन से मांग है कि तीनों परिवारों के गिरे हुए मकानों का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। उनकी पात्रता की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार आवास योजना का लाभ दिलाने की कार्रवाई की जाए।
गरीब परिवारों के लिए सरकारी योजनाओं का वास्तविक अर्थ तभी है, जब संकट की घड़ी में उन्हें कागजी दावों के बजाय जमीन पर मदद मिले। इन परिवारों को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि रहने के लिए सुरक्षित छत चाहिए।
