- बृजमनगंज में कानून बेबस, शराब माफिया बेखौफ
सौरभ जायसवाल
बृजमनगंज, महाराजगंज। बृजमनगंज थाना क्षेत्र में कच्ची शराब अब केवल अवैध धंधा नहीं रही, बल्कि यह एक संगठित अपराध और स्थानीय स्तर पर फलता-फूलता “कुटीर उद्योग” बन चुकी है। यह कारोबार बीते वर्षों में कई जिंदगियां लील चुका है, बावजूद इसके प्रशासनिक कार्रवाई सवालों के घेरे में है।
पांच साल में कई मौतें, फिर भी सन्नाटा
फुलमनहा ग्रामसभा में पिछले पांच वर्षों के भीतर कच्ची शराब के सेवन से कई लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या ये मौतें प्रशासन की नजरों से ओझल रहीं, या फिर इन्हें फाइलों में दबा दिया गया। न तो किसी बड़ी जांच की खबर सामने आई, न ही कोई ठोस निवारक कदम।
विरोध की कीमत: मारपीट, धमकी और खामोशी
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने कच्ची शराब के खिलाफ आवाज उठाई, तो शराब माफियाओं ने एक व्यक्ति की सरेआम पिटाई कर दी। पीड़ित न्याय की आस में थाने के चक्कर काटता रहा, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह सवाल उठता है कि क्या शराब माफिया कानून से ऊपर हैं?
हर गांव में भट्टियां, हर टोले में बिक्री

स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार बृजमनगंज थाना क्षेत्र का शायद ही कोई गांव बचा हो, जहां कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री न हो रही हो। फुलमनहा, लेहड़ा, दुर्गापुर, विशुनपुर अद्रवना, बचगंगपुर, बैसार, परगापुर, हथिगड़वा, पुरन्दरपुर, पृथ्वीपलगढ़ लगभग हर ग्रामसभा में जंगलों, टोलों और चौराहों पर अवैध भट्टियां धधक रही हैं।
मंदिर के पास शराब, चौकी से महज 300 मीटर
सबसे चौंकाने वाली तस्वीर लेहड़ा दुर्गा मंदिर क्षेत्र की है। यह आस्था का केंद्र है, लेकिन यहीं से महज 300 मीटर की दूरी पर पुलिस चौकी के नजदीक रोजाना कच्ची और देशी शराब की खुलेआम बिक्री होती है।
गर्मी, सर्दी या बारिश हर मौसम में शाम ढलते ही शराबियों की महफिलें सजती हैं। सवाल है, क्या यह सब पुलिस की नजर से छिपा है या जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है?
30 रुपये का नशा, 100 रुपये का कानून
जहां सरकारी शराब ठेकों पर सौ रुपये से कम में शराब नहीं मिलती, वहीं कच्ची शराब का गिलास मात्र 30 रुपये में उपलब्ध है। नशा इतना तीव्र कि एक गिलास ही काफी। नतीजा बुजुर्ग, युवा और यहां तक कि किशोर भी इसकी गिरफ्त में हैं।
क्यों फल-फूल रहा है यह अवैध कारोबार?
स्थानीय स्तर पर तीन बड़े कारण सामने आते हैं:
- कम लागत, भारी मुनाफा
- कच्चे माल की आसान उपलब्धता
- पुलिस व आबकारी विभाग की कथित मिलीभगत
ग्रामीणों का दावा है कि कई परिवारों की आजीविका ही इस अवैध कारोबार पर निर्भर हो चुकी है।
‘हफ्ता सिस्टम’ के आरोप
नाम न छापने की शर्त पर एक कच्ची शराब विक्रेता ने दावा किया कि कथित रूप से पकड़े जाने पर प्रति व्यक्ति 5,000 रुपये देने पर तत्काल रिहाई मिल जाती है। यह भी आरोप है कि थाने से सिपाही नियमित रूप से शराब उठाकर ले जाते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन ये सवाल बेहद गंभीर हैं।
प्रशासन का पक्ष
आबकारी इंस्पेक्टर का कहना है कि लगातार छापेमारी की जाती है, लेकिन जमानती धाराओं के कारण आरोपी छूटकर फिर वही काम शुरू कर देते हैं।
वहीं थाना अध्यक्ष बृजमनगंज सत्य प्रकाश सिंह का कहना है कि उन्हें इस तरह की गतिविधियों की जानकारी नहीं है। यदि ऐसी सूचना मिलती है तो अभियान चलाकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जनता के सवाल अब भी कायम
- जब मौतें हो रही थीं, तब ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- मंदिर और पुलिस चौकी के पास शराब कैसे बिक रही है?
- क्या बृजमनगंज थाना क्षेत्र में कानून केवल कागजों तक सीमित है?
- आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है यह अवैध साम्राज्य?


















