शकील अहमद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में 25 फरवरी 2026 को दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि संजय प्रसाद, अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री एवं गृह विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान में नव-निर्मित जिम ‘सिनर्जी’ तथा इनोवेशन एवं इनक्यूबेशन सेंटर ‘दक्ष’ का भी उद्घाटन किया गया।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने मुख्य अतिथि संजय प्रसाद तथा विशिष्ट अतिथियों डॉ. हरिओम (आईएएस), पंधारी यादव (आईएएस) और आईआईएम लखनऊ के निदेशक प्रो. एम.पी. गुप्ता को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
अपने संबोधन में संजय प्रसाद ने कहा कि प्रदेश में फॉरेंसिक जांच की पूर्व व्यवस्था सीमित थी। पहले केवल लखनऊ और आगरा में दो प्रयोगशालाएं थीं, जिससे जटिल मामलों में रिपोर्ट तैयार होने में समय लगता था।
अब मुख्यमंत्री के नेतृत्व और केंद्र सरकार के सहयोग से प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर अत्याधुनिक फॉरेंसिक लैब स्थापित की जा चुकी हैं। अधिकांश लैब पूर्ण रूप से संचालित हैं तथा डीएनए परीक्षण सहित सभी आवश्यक विभाग एक ही परिसर में उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश न्याय व्यवस्था को डिजिटल और लगभग पेपरलेस बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पुलिस स्टेशन, जेल, अस्पताल और फॉरेंसिक लैब को इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है तथा रिपोर्टिंग ऑनलाइन की जा रही है। प्रत्येक जिले में साइबर थाना और साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं।
एआई आधारित अपराध फिशिंग, डीपफेक वीडियो, वॉयस क्लोनिंग और डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षित टीमें गठित की गई हैं। उन्होंने कहा, “आज की चुनौती एआई बनाम एआई की है,” और प्रदेश आधुनिक तकनीक व प्रशिक्षित मानव संसाधन के साथ इसका सामना कर रहा है।
डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि संस्थान की ढाई वर्षों की उपलब्धियां “जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट क्राइम” विजन का परिणाम हैं। उन्होंने संस्थान को वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प दोहराया। विशिष्ट अतिथि डॉ. हरिओम (आईएएस) ने साइबर सिक्योरिटी और फॉरेंसिक क्षेत्रों में मजबूत वर्कफोर्स तैयार करने के लिए सरकारी संस्थानों और उद्योग के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
पंधारी यादव (आईएएस) ने बताया कि 2020 के बाद शुरू हुए विभिन्न कोर्सों में अब 500 से अधिक प्रवेश हो चुके हैं। “डिजिटल सुरक्षा: प्रमुख बिंदु” पैनल में आईआईएम लखनऊ के निदेशक प्रो. एम.पी. गुप्ता, आईआईआईटी लखनऊ के निदेशक प्रो. अरुण मोहन शैरी तथा आरएमएलएनएलयू लखनऊ के कुलपति प्रो. (डॉ.) अमर पाल सिंह ने एआई, साइबर सुरक्षा और कानूनी अनुपालन के समन्वय पर विचार रखे।
ब्रविटी डिजिटल इंक, यूएसए के संस्थापक एवं सीईओ पवन शर्मा ने एआई और साइबर सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए। डॉ. निखिल जोशी (को-फाउंडर एवं निदेशक, लाइफ फाउंडेशन, मुंबई) ने राष्ट्रीय संप्रभुता के संदर्भ में एआई की भूमिका पर बल दिया। प्रो. (डॉ.) अविनाश दाधीच ने विधिक रूप से अनुपालनशील एआई फ्रेमवर्क की आवश्यकता बताई।
प्रो. अमित कपूर (स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय) ने प्रतिस्पर्धात्मकता पर एआई के प्रभाव को रेखांकित किया। नेहा जैन (आईएएस, UPDESCO) ने एआई और साइबर सुरक्षा में सरकार की पहल पर प्रकाश डाला। साइबर सुरक्षा एवं विधिक अनुपालन पैनल में किरण एस (आईपीएस), डॉ. निखिल जोशी और कर्नल (डॉ.) प्रवीण कुमार सिंह ने उभरते साइबर खतरों पर चर्चा की। हरीश सती (Zscaler) ने ‘जीरो ट्रस्ट’ साइबर सिक्योरिटी आर्किटेक्चर पर तथा मनप्रीत आनंद (कंट्री हेड–इंडिया, EC-Council) ने एआई युग में रोजगार योग्यता बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में आईजी राजीव मल्होत्रा, डीआईजी हेमराज मीना, उप निदेशक जितेंद्र श्रीवास्तव, चिरंजीव सिन्हा, अतुल यादव, पीआरओ संतोष तिवारी, डॉ. मनीष राय, गिरिजेश राय, डॉ. पलक, डॉ. हबीब-उर-रहमान, डॉ. शश्या मिश्र, डॉ. मिमंषा जैशल, डॉ. आशुतोष पाण्डेय, डॉ. प्रीति मालिक, डॉ. नेहा सिंह, उप निरीक्षक शैलेन्द्र सिंह एवं कार्तिकेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


















