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नई दिल्ली। द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार प्रदान किए। यह पुरस्कार विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाते हैं।
राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार के दूसरे संस्करण के अंतर्गत कुल चार श्रेणियों-विज्ञान रत्न, विज्ञान श्री, विज्ञान युवा और विज्ञान टीम में 24 वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया।
जयंत विष्णु नार्लीकर को मरणोपरांत विज्ञान रत्न
इस वर्ष का सर्वोच्च सम्मान विज्ञान रत्न देश के प्रख्यात भौतिक विज्ञानी जयंत विष्णु नार्लीकर को मरणोपरांत प्रदान किया गया। उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जीवन भर दिए गए अतुलनीय योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया। राष्ट्रपति ने उनके कार्यों को भारतीय विज्ञान जगत के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
विज्ञान श्री पुरस्कार पाने वाले वैज्ञानिक
विज्ञान श्री श्रेणी में विभिन्न विषयों से जुड़े आठ वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया, जिनमें कृषि विज्ञान, परमाणु ऊर्जा, जैविक विज्ञान, रसायन विज्ञान, इंजीनियरिंग, पर्यावरण, गणित एवं कंप्यूटर विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
सम्मानित वैज्ञानिकों में ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह (कृषि विज्ञान), यूसुफ मोहम्मद शेख (परमाणु ऊर्जा), के. थंगराज (जैविक विज्ञान), प्रदीप थलप्पिल (रसायन विज्ञान), अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित (इंजीनियरिंग विज्ञान), एस. वेंकट मोहन (पर्यावरण विज्ञान), महान एम.जे. (गणित एवं कंप्यूटर विज्ञान), जयन एन. (अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) शामिल रहे।
युवा वैज्ञानिकों को मिला मंच
विज्ञान युवा श्रेणी के तहत उभरते हुए 14 वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। इनमें कृषि, जैविक विज्ञान, रसायन विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, इंजीनियरिंग, गणित, चिकित्सा, भौतिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और नवाचार जैसे क्षेत्रों के युवा शोधकर्ता शामिल हैं। यह सम्मान युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
विज्ञान और नवाचार को बढ़ावा
समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिक नवाचार देश के विकास की रीढ़ हैं और ऐसे पुरस्कार शोधकर्ताओं को समाज के लिए उपयोगी कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने युवाओं से विज्ञान को करियर के रूप में अपनाने का आह्वान भी किया। राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का उद्देश्य भारतीय विज्ञान समुदाय के योगदान को पहचान देना और देश में शोध एवं नवाचार की संस्कृति को मजबूत करना है।


















