एक आवास की राह देख रहे, मां बेटे ठंड बारिश में बद से बत्तर जीवन यापन करने को मजबूर
सह संपादक एसके सोनी
रायबरेली। सरकार द्वारा चलाई जा रही आवास योजनाएं गरीबों तक क्यों नहीं पहुंचती इसका एक उदाहरण इस परिवार के घर की तस्वीरों को देखकर अंदाज लगाया जा सकता है, पिता स्व: अरुण कुमार की मृत्यु के बाद मां का एक बेटा सहारा है, जो ठेला लगाकर अपनी मां के साथ अपना जीवन यापन कर रहा है। पीड़ित परिवार के स्व पिता के द्वारा बनवाया गया एक कमरा भी जर्जर होकर गिरने की कगार पर पहुंचकर मौत को दावत दे रहा है।
ऐसे में ठंड से बारिश तक परिवार किस तरह से जीवन यापन करता है आप अंदाज लगा सकते हैं। जनपद के खीरों ब्लॉक ग्राम सभा दुकनहा में एक पीड़ित परिवार बीते कई सालों से आवास की राह देख रहा है, पीड़िता ने जुलाई 2024 में विद्यावती पत्नी स्वर्गीय अरुण कुमार ने खंड विकास अधिकारी सहित उच्च अधिकारी मुख्य विकास अधिकारी से आवास के लिए गुहार भी लगाई, लेकिन किसी ने उसे पीड़ित परिवार की ओर ध्यान आकर्षित नहीं किया। तस्वीरों में देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पीड़ित परिवार किस तरह से अपना जीवन यापन कर रहा होगा।
प्रधान का आवास चंद कदम की दूरी पर, फिर भी आवास से वंचित
सबसे बड़ी बात यह की ग्राम प्रधान का आवास भी पीड़ित परिवार के घर से चंद कदम की दूरी पर है, लेकिन ग्राम प्रधान ने भी पीड़ित परिवार को एक कॉलोनी आवंटित करना उचित नहीं समझा। अब ऐसे में क्या समझा जाए कि आखिर पीड़ित परिवार को कॉलोनी क्यों नहीं मिली। निष्पक्ष भारतीय पत्रकार संगठन मांग करता है कि उच्च अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लेकर पीड़ित परिवार को एक कॉलोनी आवंटित करें, ताकि उसका भी जीवन बद से बत्तर से थोड़ा बेहतर बन सके।
सरकार की चल रही गरीबों की योजनाएं धरातल पर किस तरह से उतर रही हैं इसका एक उदाहरण यह भी है। आखिरकार इसका जिम्मेदार किसे ठहराया जाए।



















