शकील अहमद
लखनऊ। सरोजनी नगर ने आज ‘द ग्रीन शिफ्ट’ के अंतर्गत ‘नेट ज़ीरो इंडस्ट्री’ पहल का शुभारंभ करते हुए NetZeroSarojiniNagar2047 विजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम उठाया।
यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित हुआ, जहां पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि “उपचार से बेहतर रोकथाम होती है” और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि समस्याओं के उत्पन्न होने की प्रतीक्षा करने के बजाय, हमें संवेदनशीलता और सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ उनके समाधान की दिशा में कार्य करना चाहिए।
उन्होंने विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उद्योगों को एक मंच पर लाकर संवाद और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देना एक सराहनीय पहल है।
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में यह पहल एक समग्र और समयबद्ध नेट ज़ीरो रोडमैप का महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसमें नेट ज़ीरो स्कूल एवं कॉलेज, नेट ज़ीरो सोसायटी एवं आरडब्ल्यूए, नेट ज़ीरो टाउनशिप, नेट ज़ीरो इंडस्ट्री और नेट ज़ीरो गांव एवं सरोवर जैसे पांच प्रमुख आयाम शामिल हैं।
इससे पहले तराई क्षेत्र में कई कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया गया था और अब यह पहल जमीनी क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कार्यक्रम में UP Roller Association, Radico Khaitan, K3M Road Safety and Advertising, GPS Renewable Pvt. Ltd., SLMG Beverages Pvt Ltd तथा Jakson Renewable सहित कई प्रमुख औद्योगिक संस्थानों ने सक्रिय भागीदारी की।
इसके साथ ही रामेश्वर सिंह, रजनीश सेठी, विकास आर्य, विवेक लाधानी, शैलेश विक्रम सिंह, तेजपाल सियाल, अजय गुप्ता, करण चंदा, शिव शंकर अवस्थी और सर्वेश गोयल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार हीट स्ट्रेस के कारण 5–6% कार्य घंटे का नुकसान, प्रदूषण के कारण 8–10% वार्षिक उत्पादकता में कमी, प्रति ₹1 करोड़ टर्नओवर पर एमएसएमई को ₹5–10 लाख तक का नुकसान तथा सरोजनी नगर औद्योगिक क्षेत्र में ₹100 करोड़ से अधिक का वार्षिक नुकसान हो रहा है।
वैश्विक स्तर पर भी तापमान में 1.1°C वृद्धि, हर वर्ष 70 लाख मौतें और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संभावित प्रभाव जैसे गंभीर तथ्य सामने रखे गए।
इस पहल के तहत यह स्पष्ट किया गया कि ‘नेट ज़ीरो’ अब केवल पर्यावरणीय लक्ष्य नहीं बल्कि एक आर्थिक अवसर भी है। रूफटॉप सोलर से 30% तक ऊर्जा लागत में कमी, दक्षता सुधार से 30–50% तक बचत, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन से प्रति एमएसएमई ₹5–20 लाख का लाभ, निर्यात में 2–3% प्रीमियम और कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय की संभावनाएं बताई गईं।
उद्योगों को सहयोग देने के लिए व्यापक समर्थन प्रणाली भी तैयार की गई है, जिसमें ZED Certification, MSE-GIFT, RAMP जैसी सरकारी योजनाएं, रियायती ऋण, ग्रीन फाइनेंसिंग, CGTMSE कवरेज और विशेषज्ञों द्वारा नेट ज़ीरो हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं शामिल हैं। निजी भागीदारों द्वारा कार्बन अकाउंटिंग और ऊर्जा दक्षता से जुड़े समाधान भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
अधिकाधिक उद्योगों को जोड़ने के लिए 5 जून को ‘द ग्रीन शिफ्ट इंडस्ट्रियल एक्सीलेंस अवॉर्ड’ की घोषणा की गई है, जिसमें सर्वश्रेष्ठ इकाई को ₹5 लाख का पुरस्कार दिया जाएगा। कार्यक्रम में उद्योगों के लिए स्पष्ट कार्यान्वयन ढांचा भी प्रस्तुत किया गया- Detect → Design → Deploy → Deliver—जिससे इस पहल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।
इस अवसर पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि “नेट ज़ीरो अब कोई दूर का लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह एक मापने योग्य, प्राप्त करने योग्य और लाभकारी मॉडल बन चुका है। सरोजनी नगर ने इस दिशा में पहला कदम उठा लिया है और यह पहल उद्योगों को सतत विकास के नेता के रूप में स्थापित करेगी।”
इस पहल के साथ सरोजिनी नगर विकेंद्रीकृत जलवायु कार्रवाई का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है, जो यह दर्शाता है कि स्थानीय नेतृत्व, औद्योगिक सहभागिता और सुनियोजित रणनीति के माध्यम से भारत के सतत भविष्य की दिशा तय की जा सकती है।


















