RTI का जवाब नहीं, रिकॉर्ड नहीं, पराली मामले में कार्रवाई पर किसान ने उठाए सवाल

  • फरेंदा तहसील के किसान ने मांगी जांच रिपोर्ट, फोटो और GPS लोकेशन की जानकारी, निर्धारित समय में सूचना न मिलने पर प्रथम अपील की तैयारी

सौरभ जायसवाल

महराजगंज। फरेंदा तहसील क्षेत्र के किसान शिव प्रकाश जायसवाल ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पराली जलाने के एक मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, लेकिन आज तक उन्हें यह नहीं बताया गया कि यह कार्रवाई किन साक्ष्यों और किस जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई।

किसान शिव प्रकाश जायसवाल के अनुसार, मामले से संबंधित अभिलेखों की जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्होंने 15 अप्रैल 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत लोक सूचना अधिकारी, तहसील फरेंदा को आवेदन भेजा था। विभाग द्वारा आवेदन 16 अप्रैल 2026 को प्राप्त भी कर लिया गया था।

आवेदन में उन्होंने लेखपाल की रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट, मौके के फोटोग्राफ, जीपीएस लोकेशन, निरीक्षण विवरण, नोटिस जारी किए जाने का आधार तथा कार्रवाई से संबंधित अन्य अभिलेखों की जानकारी मांगी थी।

किसान का आरोप है कि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद उन्हें कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही विभाग की ओर से कोई जवाब दिया गया। उनका कहना है कि यदि किसी किसान के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है तो उसे कार्रवाई का आधार जानने का अधिकार भी मिलना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि लेखपाल द्वारा कोई रिपोर्ट तैयार की गई थी तो उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने में क्या कठिनाई है। इसी प्रकार यदि मौके का निरीक्षण किया गया था तो उससे संबंधित फोटो, जीपीएस लोकेशन और अन्य अभिलेख सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं।

शिव प्रकाश जायसवाल का कहना है कि यह मामला केवल एक किसान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सूचना के अधिकार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को सरकारी अभिलेखों तक पहुंच का अधिकार प्रदान करता है, ऐसे में निर्धारित समय के भीतर सूचना उपलब्ध न कराना कई सवाल खड़े करता है।

किसान ने बताया कि सूचना न मिलने की स्थिति में वह प्रथम अपील दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका। यदि विभाग की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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