- खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 से निवेश, रोजगार और निर्यात को मिली रफ्तार, 24 नए निवेश प्रस्ताव स्वीकृत
शकील अहमद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 राज्य में निवेश, रोजगार और निर्यात को नई गति देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है। इसी क्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त एवं उत्तर प्रदेश शासन की राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति (एसएलईसी) के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को कृषि उत्पादन आयुक्त कार्यालय सभागार में समिति की 20वीं बैठक आयोजित की गई।
बैठक में नीति की प्रगति, निवेश प्रस्तावों, सब्सिडी वितरण, रोजगार सृजन तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की उपलब्धियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान प्रदेश के 25 जनपदों से प्राप्त 27 नए निवेश प्रस्तावों पर विचार किया गया। इनमें गोरखपुर में बेकरी उत्पाद इकाई विस्तार, बाराबंकी में मल्टीग्रेन फ्लोर मिल, मुरादाबाद में फ्रोजन मटर एवं सब्जी प्रसंस्करण इकाई विस्तार, कुशीनगर में सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन यूनिट, प्रयागराज में दुग्ध प्रसंस्करण इकाई, जौनपुर में पास्ता एवं नूडल्स निर्माण इकाई, हाथरस में नमकीन एवं पैकेज्ड खाद्य उत्पाद इकाई तथा वाराणसी में नमकीन एवं स्वीट्स उत्पाद इकाई विस्तार जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल थीं। इसके अलावा विभिन्न जनपदों में सोलर पावर प्लांट स्थापित करने के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
समिति ने 27 प्रस्तावों में से 24 प्रस्तावों को स्वीकृति, दो प्रस्तावों को निरस्त तथा एक प्रस्ताव को शर्तों के साथ स्थगित करने का निर्णय लिया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त एवं एसएलईसी के अध्यक्ष दीपक कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने, निवेश आकर्षित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बन रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निवेशकों को समयबद्ध एवं पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि निवेश प्रक्रिया और अधिक सरल एवं प्रभावी बन सके।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उत्तर प्रदेश शीघ्र ही देश का अग्रणी निवेश गंतव्य बनेगा, जिससे किसानों, उद्यमियों और युवाओं को व्यापक लाभ मिलेगा। बैठक के दौरान उन्होंने समिति के सदस्यों तथा इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के वाइस प्रेसिडेंट से पूर्वांचल के जनपदों में निवेश बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने का आह्वान किया।
उन्होंने सुझाव दिया कि पूर्वांचल के मंडल मुख्यालयों पर रोड-शो आयोजित किए जाएं, जिनमें स्थानीय फूड प्रोसेसरों एवं प्रदेश तथा अन्य राज्यों में उद्योग संचालित कर रहे उद्यमियों को आमंत्रित कर उन्हें खाद्य प्रसंस्करण नीति की जानकारी दी जाए और पूर्वांचल में निवेश के लिए प्रेरित किया जाए।
बैठक के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले उद्यमी मित्र सैफ अली रिज़वी एवं दिव्यांश कुमार ओझा (इन्वेस्ट यूपी, लखनऊ) को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी.एल. मीणा ने बताया कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत 18 जून 2026 तक कुल 1,759 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 540 परियोजनाओं को राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति द्वारा स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। मार्च 2026 तक स्वीकृत परियोजनाओं की संख्या 501 थी, जो अब बढ़कर 540 हो गई है।
उन्होंने बताया कि पहले लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी होने में 60 से 70 दिन का समय लगता था, जिसे घटाकर अब 25 से 27 दिन कर दिया गया है। इसी प्रकार पहले परियोजनाओं को क्रियाशील होने में औसतन 540 दिन लगते थे, जबकि अब यह अवधि घटकर लगभग 200 दिन रह गई है। कम समय में स्वीकृतियां और सब्सिडी मिलने से निवेशकों का उत्साह बढ़ा है तथा परियोजनाओं से अपेक्षाकृत जल्दी आय प्राप्त हो रही है।
बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से जून 2026 तक 462 परियोजनाओं को लगभग 385.30 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है। इनमें 317 परियोजनाओं को प्रथम किश्त तथा 145 परियोजनाओं को द्वितीय किश्त का भुगतान किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 68 परियोजनाओं को 68.01 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय प्रगति दर्शाती है।
बैठक में नीति से लाभान्वित सफल उद्यमियों के अनुभव भी साझा किए गए। अलीगढ़ की एम.डी. फ्रेश वेज प्राइवेट लिमिटेड को 49.50 लाख रुपये का अनुदान तथा 6 करोड़ रुपये का टर्म लोन प्राप्त हुआ, जिसके बाद कंपनी का वार्षिक कारोबार बढ़कर 61 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और 150 से अधिक लोगों को रोजगार मिला। इसी प्रकार रामपुर की आर.जे. इंडस्ट्रीज को 9.70 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया, जिससे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश और उत्पादन को नई गति मिली।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के क्रियान्वयन में भी उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना हुआ है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 7,273 लाभार्थियों को ऋण वितरण किया गया, जो देश में सर्वाधिक है। वहीं वर्ष 2026-27 में भी 701 स्वीकृत आवेदनों के साथ उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर बना हुआ है।
जनपद स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों में प्रयागराज, सुल्तानपुर, फतेहपुर, कानपुर नगर, अम्बेडकर नगर, उन्नाव, रायबरेली, गोरखपुर, हरदोई और सिद्धार्थनगर प्रमुख रहे। इन जनपदों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और ऋण स्वीकृति में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।













