- कतर्नियाघाट में वन्यजीव संरक्षण और महिला सशक्तिकरण को मिली नई गति, पर्यावरण संरक्षण के लिए कई अहम पहल की घोषणा
शकील अहमद
लखनऊ/बहराइच। वन्यजीव संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य स्थित इको अवेयरनेस सेंटर में Environment Warriors की आधिकारिक वेबसाइट www.environmentwarriors.org के शुभारंभ एवं वनकर्मियों के प्रोत्साहन एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) अपूर्व दीक्षित, आईएफएस के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सहभागिता की। उन्होंने कहा, “सेवा और संकल्प के मार्ग पर चलते हुए हमारा निरंतर प्रयास रहा है कि समाज के हर वर्ग- चाहे वह जन-सामान्य हो या हमारी वन सीमाओं की प्रहरी बेटियां को सम्मान और सुविधा दोनों प्राप्त हों। आज का यह आयोजन उसी संकल्प की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।”

उत्तर प्रदेश वन विभाग में पहली बार इस प्रकार की अभिनव पहल के अंतर्गत सात महिला वनकर्मियों को सात इलेक्ट्रिक स्कूटर प्रदान किए गए, जिन्हें डॉ. राजेश्वर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये पर्यावरण-अनुकूल वाहन महिला वनरक्षकों को दुर्गम क्षेत्रों में मौन एवं शून्य-उत्सर्जन गश्त संचालित करने में सक्षम बनाएंगे। इसके साथ ही मानसून एवं रात्रिकालीन गश्त को सुरक्षित एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 100 रेनकोट तथा 100 टैक्टिकल टॉर्च भी वितरित किए गए।
यह कार्यक्रम Environment Warriors संस्था के तत्वावधान में तथा श्री पीताम्बरा बगलामुखी सिद्ध पीठ उत्तराखंड ट्रस्ट, लखनऊ के सहयोग से आयोजित किया गया।
अपने संबोधन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) की ‘लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2024’ पूरी मानवता के लिए गंभीर चेतावनी है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1970 से 2020 के बीच मात्र 50 वर्षों में विश्व की निगरानी की गई वन्यजीव आबादी के औसत आकार में 73 प्रतिशत की चिंताजनक गिरावट दर्ज हुई है।
उन्होंने बताया कि जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (ZSL) द्वारा तैयार लिविंग प्लैनेट इंडेक्स लगभग 5,495 प्रजातियों की 35,000 कशेरुकी आबादियों के अध्ययन पर आधारित है। इसमें मीठे पानी की प्रजातियों में 85 प्रतिशत, स्थलीय जीवों में 69 प्रतिशत तथा समुद्री जीवों में 56 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, क्षेत्रवार लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन में 95 प्रतिशत, अफ्रीका में 76 प्रतिशत तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 60 प्रतिशत गिरावट सामने आई है।
उन्होंने कहा कि यह केवल वन्यजीवों का संकट नहीं, बल्कि जल, भोजन, जलवायु संतुलन और मानव सभ्यता के भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है। ऐसे समय में कतर्नियाघाट, दुधवा और पीलीभीत जैसे जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्रों का संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने डीएफओ अपूर्व दीक्षित एवं उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि पिछले 100 वर्षों में वैश्विक तापमान लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख लोगों की मृत्यु प्रदूषण के कारण होती है तथा प्रतिदिन लगभग 2,000 ट्रक प्लास्टिक कचरा समुद्रों में पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 36 करोड़ पौधरोपण अभियान के माध्यम से 200 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं और दुधवा, कतर्नियाघाट तथा पीलीभीत जैसे संरक्षित क्षेत्रों का संरक्षण राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वन्यजीव-मानव संघर्ष की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अब तक लगभग 10 सोलर वाटर पंप स्थापित किए जा चुके हैं तथा इस वर्ष कम से कम 25 अतिरिक्त सोलर वाटर पंप लगाए जाएंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जल्द ही पुरुष वनकर्मियों को भी गश्त के लिए 10 ई-बाइक उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि वर्ष के 300 से अधिक दिन जंगलों में बिताने वाले वनकर्मी वास्तव में प्रकृति के सबसे समर्पित प्रहरी हैं, जिनका योगदान समाज के लिए अमूल्य है।
कार्यक्रम के उपरांत डॉ. राजेश्वर सिंह ने कतर्नियाघाट के घड़ियाल, मगरमच्छ एवं कछुआ संरक्षण केंद्र का भ्रमण किया और इसे विश्वस्तरीय संरक्षण मॉडल बताया। उन्होंने संरक्षण केंद्र में चल रहे प्रयासों की सराहना करते हुए मैसेज वॉल पर प्रेरणादायी संदेश लिखकर हस्ताक्षर भी किए।
अपने संबोधन के समापन पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत की जैव विविधता की रक्षा तथा महिला सशक्तिकरण के इस अभियान को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि वन विभाग की आवश्यकताओं को लेकर वे माननीय वन मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करेंगे।
इस अवसर पर अपूर्व दीक्षित (डीएफओ, कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग), शिवाकांत शर्मा (एसडीओ, कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग), आशीष गौड़ (रेंज वनाधिकारी, कतर्नियाघाट रेंज), अम्बालिका ग्रुप के चेयरमैन अम्बिका मिश्रा, हरीश सिद्धार्थ, मयंक पाण्डेय (डिप्टी रेंजर), राधेश्याम (वन दरोगा) सहित वन विभाग के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।













