- ‘फ्रीडम थ्रू डिजिटल एजुकेशन’ कार्यक्रम में डॉ. राजेश्वर सिंह ने डिजिटल शिक्षा को राष्ट्रीय मिशन बनाने पर दिया जोर, 2030 तक हर विद्यालय में आधुनिक सुविधाओं का रखा लक्ष्य
शकील अहमद
सरोजनीनगर, लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोमवार को राज एस्टेट पब्लिक स्कूल, पारा में एसोसिएशन ऑफ 41 क्लब्स ऑफ इंडिया एवं क्लब 95 लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “फ्रीडम थ्रू डिजिटल एजुकेशन” कार्यक्रम के अंतर्गत 44वीं अत्याधुनिक स्मार्ट कक्षा का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर डॉ. सिंह ने कहा कि राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा कार्य केवल इमारतें बनाना नहीं, बल्कि चरित्रवान, शिक्षित, संस्कारित और तकनीकी रूप से सक्षम नागरिक तैयार करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण कराना नहीं, बल्कि बच्चों में जिज्ञासा, नवाचार, वैज्ञानिक सोच, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बच्चे के जीवन के प्रारंभिक आठ वर्ष उनके संपूर्ण व्यक्तित्व और बौद्धिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवधि होते हैं। इस आयु में बच्चे देखकर, समझकर, अनुभव करके और सहभागिता के माध्यम से सबसे प्रभावी ढंग से सीखते हैं। ऐसे में स्मार्ट कक्षाएँ केवल आधुनिक सुविधा नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी शिक्षा का सशक्त माध्यम हैं। इससे रटने की प्रवृत्ति समाप्त होती है तथा बच्चों में रचनात्मक सोच, तार्किक क्षमता और समस्या-समाधान कौशल का विकास होता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि डिजिटल रूप से सक्षम भारत को राष्ट्रीय मिशन बनाया जाए। उन्होंने वर्ष 2030 तक प्रत्येक विद्यालय में शत-प्रतिशत ब्रॉडबैंड सुविधा, देश की 95 प्रतिशत आबादी तक इंटरनेट की पहुँच, कक्षा छह से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं संगणकीय प्रोग्रामिंग की शिक्षा, प्रत्येक माध्यमिक विद्यार्थी को डिजिटल अध्ययन उपकरण तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत में डिजिटल पुस्तकालय स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज विलासिता नहीं, बल्कि विकसित भारत की अनिवार्य आवश्यकता है। तकनीक शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती, बल्कि शिक्षक को और अधिक प्रभावी एवं सक्षम बनाती है।
डॉ. सिंह ने बताया कि सरोजनीनगर में जुलाई 2022 से प्रारंभ डिजिटल पुस्तकालय एवं स्मार्ट कक्षा अभियान के अंतर्गत अब तक 37 विद्यालयों में 450 से अधिक कंप्यूटर उपलब्ध कराकर डिजिटल प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं तथा आज के साथ कुल 44 अत्याधुनिक स्मार्ट कक्षाएँ समर्पित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त 2,000 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को टैबलेट वितरित किए गए हैं, ताकि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभा के मार्ग में बाधा न बने।
उन्होंने बताया कि डिजिटल सशक्तिकरण को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से स्थापित 15 आरबीएस डिजिटल सशक्तिकरण केंद्रों के माध्यम से 1,000 से अधिक विद्यार्थियों को डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण तथा 8,000 से अधिक नागरिकों को निःशुल्क ई-गवर्नेंस सेवाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। इन केंद्रों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, ग्राफिक डिजाइन, वीडियो संपादन, कार्यालयी कंप्यूटर संचालन तथा अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें जिज्ञासु बनने, निरंतर सीखने, नई तकनीकों को अपनाने तथा ज्ञान को राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा को विद्यालयी शिक्षा की मूलभूत आवश्यकता के रूप में स्वीकार करना होगा।
इस अवसर पर उनके बड़े भाई रामेश्वर सिंह (सेवानिवृत्त भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी एवं सदस्य, उत्तर प्रदेश रेरा), विद्यालय के संस्थापक प्रबंधक राज बाबू रस्तोगी, प्रबंध निदेशक आकांक्षा रस्तोगी, शैक्षणिक निदेशक एवं प्रधानाचार्या प्रियंका भारद्वाज, एसोसिएशन ऑफ 41 क्लब्स ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपिंदर सिंह, क्षेत्र-9 के अध्यक्ष मनीष टंडन, क्षेत्र-9 के उपाध्यक्ष रजनीश सेठी, क्लब 95 लखनऊ के अध्यक्ष विवेक जायसवाल, नीलम कोहली तथा डॉ. अनुराग देवान सहित अनेक गणमान्य अतिथि, शिक्षाविद् एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन के समापन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे आने वाले समय में विश्व के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करें, तो हमें उन्हें आज ही विश्वस्तरीय कक्षाएँ उपलब्ध करानी होंगी। स्मार्ट कक्षाएँ कोई विलासिता नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की अनिवार्य आवश्यकता हैं।”













