आर्यकुल के ‘नवरंग-2026’ में बोले डॉ. राजेश्वर सिंह, आर्थिक शक्ति के दम पर भारत फिर हासिल करेगा गौरव

डांडिया महोत्सव में भगवान विष्णु के अवतारों पर आधारित प्रस्तुतियों ने मोहा मन
विधायक ने युवाओं को AI, बायोटेक्नोलॉजी और दीर्घायु विज्ञान में अवसर तलाशने का दिया संदेश
शकील अहमद
लखनऊ। आर्यकुल ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में 10वें ‘नवरंग-2026’ डांडिया महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति, परंपरा और लोककला का मनोहारी संगम देखने को मिला। भगवान विष्णु के दिव्य अवतारों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सनातन संस्कृति की अनुपम झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण आर्यकुल के चार सदनों वल्लभी, उज्जैन, तक्षशिला और नालंदा के बीच आयोजित डांडिया प्रतियोगिता रही। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को मंच पर जीवंत किया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। उनके अनुसार, प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है और नागरिक स्वयं को पहले से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
डॉ. सिंह ने दावा किया कि पिछले लगभग 10 वर्षों में 80 हजार से अधिक अपराधियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है तथा 17 हजार से अधिक पुलिस मुठभेड़ों में 24 हजार से अधिक अपराधी घायल हुए हैं।
उन्होंने युवाओं को भविष्य की उभरती संभावनाओं से परिचित कराते हुए वैश्विक स्तर पर तेजी से विकसित हो रहे दीर्घायु विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी को महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।
उन्होंने कहा कि आने वाला समय इन क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी दक्षता का होगा। युवाओं को अभी से इन विषयों में ज्ञान और कौशल विकसित कर भविष्य की चुनौतियों तथा अवसरों के लिए स्वयं को तैयार करना चाहिए।
मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और उत्कृष्ट प्रस्तुतियों की सराहना की। शिक्षकों के योगदान पर उन्होंने कहा कि शिक्षक उस दीपक के समान होता है, जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सर्वोपरि है, क्योंकि वे आने वाली पीढ़ियों के विचार, चरित्र और भविष्य का निर्माण करते हैं।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि एक समय भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, लेकिन उसकी अपार संपदा ने विदेशी आक्रांताओं को आकर्षित किया और देश को बार-बार लूटा गया। उन्होंने कहा कि आज भारत फिर उसी गौरवशाली आर्थिक सामर्थ्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश का लक्ष्य विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना होना चाहिए।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आर्थिक शक्ति केवल समृद्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का मजबूत आधार भी है। यदि देश की अर्थव्यवस्था सशक्त नहीं होगी तो अपनी सुरक्षा और सामरिक हितों की प्रभावी रक्षा करना कठिन होगा। इसलिए आत्मनिर्भर, समृद्ध और आर्थिक रूप से शक्तिशाली भारत का निर्माण समय की बड़ी आवश्यकता है।
डॉ. सिंह ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों, उनके मार्गदर्शक शिक्षकों और आयोजन से जुड़े सदस्यों को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में वीबीयूएसएस, अवध प्रांत के क्षेत्र संयोजक एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. जयशंकर प्रसाद पांडेय, प्रांतीय अध्यक्ष एवं बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. सुभाष मिश्र, प्रांतीय सचिव डॉ. मंजुल त्रिवेदी, प्रांतीय कोषाध्यक्ष एवं आर्यकुल ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के प्रबंध निदेशक डॉ. सशक्त सिंह, प्रांतीय उपाध्यक्ष प्रो. सुनीता कुमार, डॉ. शीर्षेन्दु शील त्रिवेदी, डॉ. अभिषेक तिवारी, डॉ. सुजीत चतुर्वेदी और डॉ. रुचिता चौधरी सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों में बंथरा नगर पंचायत के चेयरमैन प्रतिनिधि रंजीत रावत, पार्षद कौशलेन्द्र द्विवेदी, बृजमोहन शर्मा (मुकेश), गीता देवी गुप्ता, लवकुश रावत और के.एन. सिंह मौजूद रहे।
