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उत्तर प्रदेश

दीपावली पर दीदियों के बने इको-फ्रेंडली दीयों से जगमगाएंगे गांव-शहर, यूपी में महिला स्वावलंबन का नया अध्याय

दिनांक: Monday, 06 October 2025 | समय: 11:02 PM | लेखक: | श्रेणी: उत्तर प्रदेश, लखनऊ

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में महिला स्वावलंबन की नई मिसाल, दीदियों ने तैयार किए इको-फ्रेंडली उत्पाद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिला स्वावलंबन और सशक्तिकरण की दिशा में ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रयास एक नई रोशनी फैला रहे हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) की दीदियाँ इस दीपावली पर अपने बनाए सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों से गांवों और शहरों को रोशन करने जा रही हैं।

लखपति दीदी लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम

मिशन निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि राज्यभर में हजारों स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्याएँ दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए डिजाइनर दीये, मोमबत्तियाँ, गणेश-लक्ष्मी मूर्तियाँ, पूजा सामग्री और गिफ्ट हैम्पर तैयार कर रही हैं।
ये सभी उत्पाद स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

दीपा रंजन ने कहा कि “राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘लखपति दीदी’ लक्ष्य की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। समूह की महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं और उनके उत्पादों की माँग लगातार बढ़ रही है।”

दीदियों द्वारा तैयार किए गए दीपावली उत्पाद पूरी तरह इको-फ्रेंडली हैं। गाय के गोबर और पंचगव्य से बनी गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियाँ, मधुमक्खी के मोम से तैयार फैंसी मोमबत्तियाँ और मिट्टी के सुंदर डिजाइनर दीये न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि सौंदर्य और शुद्धता का प्रतीक भी हैं। इसके अतिरिक्त महिलाएँ धूप-बत्ती, अगरबत्ती और हवन सामग्री जैसे उत्पाद भी तैयार कर रही हैं, जिनकी बाजार में अच्छी माँग है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर

मिशन निदेशक ने बताया कि समूह सदस्यों के बनाए उत्पादों को एक कॉफी टेबल बुक के रूप में संकलित किया जा रहा है ताकि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके। इसके साथ ही सभी जनपदों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि स्थानीय बाजारों में दीदियों के उत्पादों को बिक्री के लिए विशेष स्थान और स्टॉल उपलब्ध कराए जाएँ।

दीपावली पर दीदियों के ये हस्तनिर्मित उत्पाद न केवल गांवों और शहरों को रोशन करेंगे, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आय और आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा देंगे।

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