शकील अहमद
लखनऊ। भारत विकास परिषद्, अवध प्रान्त द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष की प्रेरणा से आयोजित 5 दिवसीय पंचसूत्रीय कथा महोत्सव का शुभारम्भ शुक्रवार को कृष्णा नगर स्थित सुमितनाथ सेवा भवन में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने परिषद् की पंचसूत्रीय अवधारणा – संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण – को समाज-निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि यह आयोजन राष्ट्रीय चेतना को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

डॉ. सिंह ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति के प्रकृति-समन्वित दर्शन का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण को समष्टिगत जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि संसाधनों का अनियंत्रित दोहन आज वैश्विक पर्यावरण के लिए गंभीर संकट बन चुका है। उन्होंने तथ्य आधारित आंकड़ों के साथ चेताया कि वर्ष 2013 से 2023 के बीच लखनऊ के कई क्षेत्रों में भूजल स्तर लगभग 20 मीटर तक गिर चुका है। वायु प्रदूषण के कारण विश्वभर में प्रतिवर्ष लगभग 67 लाख लोगों की अकाल मृत्यु हो रही है, जिनमें भारत में 17-20 लाख मौतें शामिल हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 1970 में World Overshoot Day 25 दिसंबर को आता था, जबकि आज यह तिथि सिमटकर 24 जुलाई तक आ गई है, जो इस बात का संकेत है कि मानवता वर्ष के केवल आधे समय में ही पृथ्वी की पूरे वर्ष की वहन क्षमता समाप्त कर देती है। डॉ. सिंह ने सरोजनीनगर क्षेत्र को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी बताते हुए कहा कि लखनऊ में स्थापित कुल सोलर क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सरोजनीनगर में स्थापित है। इसके अलावा ताराशक्ति केंद्रों के माध्यम से 30,000 से अधिक पर्यावरण अनुकूल बैग वितरित कर बच्चों में जागरूकता बढ़ाई गई है, जो स्थानीय स्तर पर एक मजबूत पर्यावरण-सशक्त मॉडल प्रस्तुत करता है।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वाले चंद्र भूषण तिवारी (पेड़ वाले बाबा), राजेंद्र प्रताप सिंह और विजय सक्सेना को डॉ. सिंह द्वारा सम्मानित किया गया। इसी क्रम में पर्यावरणविद गरिमा मिश्रा द्वारा लिखित विशेष पत्रक का विमोचन भी किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने जल बचत, वृक्षारोपण और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व पर जोर देते हुए कहा कि वृक्षारोपण को आंदोलन के रूप में बदलना होगा तथा जल के संयमित उपयोग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना अनिवार्य है।
कार्यक्रम में कथावाचक अशोक जी महाराज, सुभाष जी, यशोदानंदन जी, बीरेन्द्र सिंह चौधरी, आर.के. भदौरिया, राम औतार, शंकरी सिंह, पार्षद गीता देवी, संजीव अवस्थी, के.एन. सिंह, रंजना मिश्रा सहित अनेक गणमान्यजनों की उपस्थिति रही। डॉ. राजेश्वर सिंह ने सफल आयोजन के लिए संगठन मंत्री विक्रांत खंडेलवाल एवं महासचिव एस.के. सक्सेना का आभार व्यक्त किया तथा आयोजकों और उपस्थित नागरिकों को धन्यवाद दिया।


















