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फिल्म जगत के दिग्गज और हिंदी सिनेमा के “ही-मैन” कहे जाने वाले धर्मेंद्र 24 नवंबर 2025 को इस दुनिया से विदा हो गए। लेकिन देओल परिवार के शोक और श्रद्धांजलि के बीच फिल्म निर्माता अनिल शर्मा का भावनात्मक खुलासा अब सामने आया है। उन्होंने बताया कि निधन से कुछ महीने पहले धर्मेंद्र ने उनसे सिनेमा में दोबारा वापसी की गहरी इच्छा व्यक्त की थी और यह गुजारिश उन्होंने तीन बार दोहराई थी।
“मेरे लिए शानदार रोल लिखो बेटा… कैमरा मुझे बुला रहा है”
हुसैन जैदी के यूट्यूब शो पर बातचीत में अनिल शर्मा ने कहा कि “सितंबर में मैं बॉबी देओल से मिलने गया था। धर्मेंद्र जी वहीं बैठे थे। उन्होंने मुझे गले लगाया और तुरंत पूछा- ‘क्या कर रहे हो?’ फिर बोले—प्रिय अनिल बेटा, मेरे लिए एक अद्भुत भूमिका लिखो। कैमरा मेरा प्यार है, वह मुझे बुला रहा है। मुझे उसके पास जाना है।”
शर्मा ने बताया कि यह सुनकर वे भी भावुक हो गए।
“उन्होंने मुझसे एक नहीं, तीन बार यह बात दोहराई। मैंने उनसे वादा भी किया था कि उनके लिए दमदार किरदार लिखूंगा। लेकिन किसे पता था कि कुछ महीनों बाद वह हमें छोड़कर चले जाएंगे।”
देओल परिवार में शोक, हरिद्वार में विसर्जन
बुधवार को धर्मेंद्र की अस्थियों को हरिद्वार की हर की पैड़ी पर परिवार ने गंगा में विसर्जित किया। पारिवारिक पुजारी के अनुसार, अनुष्ठान भीड़ से दूर निजी तौर पर संपन्न हुआ। सनी देओल भी स्वयं अंतिम संस्कार करना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से यह ज़िम्मेदारी पोते करण देओल को निभानी पड़ी।
स्टारडम नहीं, सादगी ही धर्मेंद्र की पहचान
अनिल शर्मा ने कहा कि “धर्मेंद्र जी 90 की उम्र में भी कैमरे के लिए वैसी ही दीवानगी रखते थे। सिनेमा उनके लिए बिजनेस नहीं, पहला प्यार था। स्टारडम ने उन्हें कभी छुआ नहीं।”
छह दशक, 300 से अधिक फिल्में और अनगिनत यादें
पंजाब में 1935 में जन्मे धर्मेंद्र का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।
उनकी यादगार फिल्मों में शामिल हैं: शोले, चुपके-चुपके, सत्यकाम, अनुपमा, सीता और गीता, आया सावन झूम के, मेरा गांव मेरा देश, समाधि, कन्यादान आदि।
आज भारतीय सिनेमा ने केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि विनम्रता, संवेदना और स्टारडम के सुंदर संतुलन की मिसाल को खो दिया है।


















