आईजीएमसी विवाद: रेजिडेंट डॉक्टर निलंबन के खिलाफ 26 दिसंबर को डॉक्टरों का सामूहिक अवकाश

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'तू' हमला विवाद: हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने 26 दिसंबर को सामूहिक अवकाश की घोषणा की; डॉक्टर का निलंबन रद्द करने की मांग

नई दिल्ली/शिमला। हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (IGMC) में एक मरीज से कथित मारपीट के मामले में निलंबित किए गए रेजिडेंट डॉक्टर के समर्थन में 26 दिसंबर को सामूहिक अवकाश की घोषणा की है। एसोसिएशन ने निलंबन को रद्द करने, घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की मांग की है।

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो राज्यभर के डॉक्टर सामूहिक अवकाश के साथ-साथ हड़ताल जैसे कदम उठाने को भी मजबूर हो सकते हैं।

 क्या है पूरा मामला

यह विवाद सप्ताह की शुरुआत में शिमला के आईजीएमसी में सामने आए एक वीडियो के बाद भड़का। वायरल वीडियो में कथित तौर पर एक नकाबपोश डॉक्टर वार्ड में बिस्तर पर लेटे मरीज को बार-बार मारते हुए दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरा व्यक्ति मरीज के पैरों को पकड़े नजर आता है।

मरीज की पहचान 36 वर्षीय अर्जुन पंवार के रूप में बताई गई है। आरोप है कि मरीज ने डॉक्टर से सम्मानजनक भाषा में बात करने का आग्रह किया था, जिसके बाद यह घटना घटी। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।

प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई

घटना के बाद पुलिस ने पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर राघव नरूला (31) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। वहीं आईजीएमसी प्रशासन ने डॉक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देश पर मामले की आंतरिक जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।

आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव के अनुसार, समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी, जबकि पुलिस जांच समानांतर रूप से जारी है।

डॉक्टरों की मांगें

हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन का कहना है कि अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने मांग की है कि:

  • रेजिडेंट डॉक्टर का निलंबन वापस लिया जाए
  • घटना की निष्पक्ष जांच हो
  • अस्पताल परिसरों में सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए जाएं

डॉक्टर संगठनों के इस रुख के बाद राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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