सौरभ जायसवाल
संतकबीरनगर। खलीलाबाद क्षेत्र में भाजपा विधायक अंकुर राज तिवारी और उनके मौसेरे भाई पर एक व्यक्ति के कथित अपहरण, मारपीट और गंभीर रूप से घायल करने के आरोप सामने आए हैं। पीड़ित की पहचान चंद्रशेखर कन्नौजिया के रूप में हुई है, जो विधायक का कथित तौर पर लंबे समय से करीबी सहयोगी बताया जा रहा है।
पीड़ित पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार यह मामला लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में खरीदी गई एक जमीन से जुड़ा हुआ है। शिकायत में कहा गया है कि विधायक अंकुर राज तिवारी उक्त भूमि को अपने नाम कराने का दबाव बना रहे थे। इसी विवाद के चलते कथित रूप से यह घटना हुई।
पीड़ित द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार 20 जनवरी की रात लगभग 11 बजे जब चंद्रशेखर कन्नौजिया एक दावत से लौट रहे थे, तभी निखरकपार चौराहे के पास दो स्कॉर्पियो वाहनों में सवार लोगों ने उनकी बाइक को टक्कर मारकर उन्हें अगवा कर लिया।
आरोप है कि विधायक के मौसेरे भाई सावंत तिवारी उर्फ भोलू तिवारी और भोला अग्रहरि, छह अज्ञात लोगों के साथ मिलकर चंद्रशेखर की आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें सहजनवा क्षेत्र स्थित एक ईंट भट्ठे पर ले गए। वहां उनके साथ कथित रूप से गंभीर मारपीट की गई।
तहरीर में यह भी कहा गया है कि पीड़ित को नग्न कर पीटा गया, उनके पैर तोड़ दिए गए और इस दौरान वीडियो भी बनाया गया। पीड़ित के परिजनों का आरोप है कि जब हमलावरों को लगा कि चंद्रशेखर की हालत गंभीर हो गई है, तो उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के किनारे फेंक दिया गया और आरोपी मौके से फरार हो गए।
पीड़ित के भाई के अनुसार जमीन बैनामे को लेकर चंद्रशेखर पहले सहमत थे, लेकिन जब उन्होंने विधायक से 28 लाख रुपये के स्टाम्प नोटिस और अपने निवेश की रकम वापस मांगी, तो विवाद बढ़ गया और कथित रूप से इसी के बाद यह घटना हुई।
वर्तमान में घायल चंद्रशेखर कन्नौजिया एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। होश में आने के बाद उन्होंने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी, जिसके आधार पर पुलिस से शिकायत की गई है।
मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण में अब तक की पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रकरण को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार लगातार गर्म है। पुलिस की खामोशी और अब तक की आधी-अधूरी कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या प्रदेश की पुलिस कानून के मुताबिक निष्पक्ष जांच करते हुए एक प्रभावशाली विधायक के विरुद्ध कार्रवाई करने का साहस दिखा पाएगी या फिर यह मामला भी रसूख और राजनीतिक दबाव की भेंट चढ़कर फाइलों में दफन हो जाएगा।


















