आर स्टीफ़न (स्टेट हेड)
चिरमिरी, एमसीबी (छत्तीसगढ़)। एमसीबी जिले के चिरमिरी नगर अंतर्गत हल्दीबाड़ी क्षेत्र में स्थित माई की बगीया मंदिर धीरे-धीरे स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। मंदिर अपने धार्मिक महत्व के साथ-साथ भौगोलिक और प्राकृतिक वातावरण के कारण भी चर्चा में है।
स्थानीय लोगों के अनुसार माई की बगीया मंदिर चिरमिरी नगर के मध्य क्षेत्र में स्थित है और लगभग चार से पांच एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। मंदिर एक पहाड़ी के नीचे स्थित है, जिसके चारों ओर हरियाली और वन क्षेत्र है। इस प्राकृतिक परिवेश के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को शांति और सुकून का अनुभव होता है। मंदिर परिसर में पूरे दिन श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है।

बताया जाता है कि मंदिर की स्थापना लगभग पांच वर्ष पूर्व हुई थी। प्रारंभिक दौर में किसी ने यह कल्पना नहीं की थी कि यह स्थल इतने कम समय में एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो जाएगा। वर्तमान में यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना के साथ-साथ विशेष अवसरों पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हर वर्ष मंदिर परिसर में मेला भी लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि स्थापना के बाद से यहां श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। स्थानीय भक्तों का कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाएं समय के साथ बेहतर हुई हैं और सामूहिक सहयोग से धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। धार्मिक आयोजनों के दौरान भोग-भंडारे की व्यवस्था भी स्थानीय लोगों द्वारा की जाती है।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से बातचीत करने पर सामने आया कि उनके लिए यह स्थल केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी केंद्र बन गया है। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिर की बढ़ती पहचान समुदाय के सहयोग और आस्था का परिणाम है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान में मंदिर परिसर में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं और किसी प्रकार की बड़ी कमी महसूस नहीं होती। उनका मानना है कि माई की बगीया का विकास आने वाले समय में और भी व्यापक रूप ले सकता है।


















