शब-ए-बारात की रात: मस्जिदों और कब्रिस्तानों में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

शकील अहमद

सरोजनीनगर, लखनऊ। राजधानी लखनऊ सहित देशभर में मंगलवार की रात शब-ए-बारात अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई। इस मौके पर अकीदतमंदों ने मस्जिदों और कब्रिस्तानों में जाकर अपने मरहूम रिश्तेदारों के लिए दुआ-ए-मगफिरत की और पूरी रात इबादत में गुजारी। शब-ए-बारात को इस्लाम में गुनाहों से माफी और रहमत की रात माना जाता है।

सरोजनीनगर क्षेत्र की मस्जिदों में विशेष नमाज और दुआओं का आयोजन किया गया। अकीदतमंदों ने देर रात तक कुरआन की तिलावत की और अल्लाह से रहमत व बरकत की दुआ मांगी। इसके साथ ही कब्रिस्तानों में जाकर लोगों ने अपने पूर्वजों की मगफिरत के लिए फातिहा पढ़ी। बुधवार को अकीदतमंदों द्वारा रोजा भी रखा जाएगा।

नूरी जमा मस्जिद के मौलाना नईम कादरी ने बताया कि इस्लामिक कैलेंडर हिजरी के आठवें महीने शाबान की 15वीं रात को शब-ए-बारात मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि मान्यता के अनुसार इसी रात इंसानों के पूरे साल के अमल का लेखा-जोखा अल्लाह के सामने पेश किया जाता है और आने वाले वर्ष की रोजी तय होती है। इसी कारण इस रात को विशेष महत्व दिया जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि शब-ए-बारात को बरकत और रहमत की रात माना जाता है, जिसमें इबादत करने वालों पर अल्लाह की विशेष कृपा होती है। इस अवसर पर क्षेत्र के सभी प्रमुख कब्रिस्तानों की साफ-सफाई कराई गई थी और आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं, ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

शब-ए-बारात के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही। सरोजनीनगर थाना पुलिस की टीमें क्षेत्र के विभिन्न कब्रिस्तानों और संवेदनशील स्थानों पर तैनात रहीं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रातभर निगरानी रखी गई और किसी भी तरह की अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली।

धार्मिक सौहार्द और शांति के माहौल में शब-ए-बारात का आयोजन संपन्न हुआ। अकीदतमंदों ने इसे आत्ममंथन, दुआ और इबादत की रात बताते हुए सामाजिक भाईचारे और अमन की कामना की।

Share this article

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts