महराजगंज। कभी-कभी ज़िंदगी ऐसी तस्वीरें सामने ला देती है, जो इंसान को भीतर तक झकझोर देती हैं। महराजगंज जिले के नौतनवा तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा धोतियाहवां से सामने आई एक ऐसी ही दर्दनाक कहानी लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है।
यहां एक ऐसा परिवार है, जिसकी जिंदगी पर गरीबी और मजबूरी का इतना गहरा साया है कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता है। इसी बीच घर की बेटी की शादी तय हो गई है, लेकिन घर में न कमाने वाला है और न शादी का खर्च उठाने की कोई व्यवस्था।
यह परिवार मरहूम यूसुफ अली का है। यूसुफ अली के निधन के बाद से ही उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका है। परिवार में अब न पिता का साया है और न ही कोई ऐसा भाई जो परिवार का सहारा बन सके। घर की जिम्मेदारियां अब पूरी तरह महिलाओं के कंधों पर आ गई हैं। टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने वाला यह परिवार किसी तरह अपनी जिंदगी गुजार रहा है।
गांव के लोग बताते हैं कि कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि घर में खाने के लिए भी कुछ नहीं होता। ऐसे में परिवार किसी तरह पड़ोसियों की मदद या छोटे-मोटे सहारे से अपना गुजारा करता है। लेकिन अब इस परिवार के सामने एक नई और बड़ी जिम्मेदारी खड़ी हो गई है।
परिवार की बेटी की शादी ईद के बाद 26 मार्च को तय हुई है। आमतौर पर बेटी की शादी किसी भी परिवार के लिए खुशी और उत्सव का मौका होती है। घर में रौनक होती है, रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहता है और तैयारियों का माहौल बन जाता है। लेकिन इस परिवार के लिए बेटी की शादी खुशी से ज्यादा चिंता और बेबसी का कारण बन गई है।
जिस घर में रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो, वहां शादी जैसे बड़े आयोजन की कल्पना करना भी कठिन है। घर में न पैसा है, न कोई स्थायी आय का साधन। शादी की तैयारियों के नाम पर परिवार के पास लगभग कुछ भी नहीं है। ऐसे में परिवार के लोगों की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
गांव के लोगों के अनुसार यह परिवार लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। हैरानी की बात यह है कि सरकार की कई योजनाएं गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए चलाई जा रही हैं, लेकिन यह परिवार आज तक उन योजनाओं का लाभ नहीं पा सका। सरकार गरीबों को आवास और आर्थिक सहायता देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन धोतियाहवां गांव का यह परिवार उन दावों से अब तक अछूता है।
परिवार का घर कच्चा और जर्जर है। बरसात के दिनों में छत टपकती है और गर्मी के मौसम में झोपड़ी के अंदर रहना मुश्किल हो जाता है। घर के खाली बर्तन और टूटी चारपाइयां इस बात की गवाही देती हैं कि यह परिवार कितनी कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहा है।
इसी बीच जब गांव और आसपास के लोगों को इस परिवार की स्थिति के बारे में जानकारी मिली तो कुछ लोगों के दिल पसीज गए। ऐसे कठिन समय में समाजसेवी यूनुस खान ने आगे आकर मदद का हाथ बढ़ाया। उन्होंने इस परिवार की स्थिति को देखते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से मदद की अपील की।
यूनुस खान की अपील का असर भी देखने को मिला। उनकी पहल के बाद कई लोगों ने मदद के लिए आगे आने की इच्छा जताई। इसी दौरान असरद और अभिषेक के सहयोग से कुछ लोगों ने मिलकर आर्थिक सहायता जुटाई। कुल मिलाकर 16,020 रुपये की मदद एकत्र की गई, जिसे परिवार को सौंप दिया गया।
यह मदद भले ही शादी के पूरे खर्च के लिए पर्याप्त न हो, लेकिन इसने परिवार के लिए उम्मीद की एक किरण जरूर जगाई है। परिवार के लोगों का कहना है कि इस सहायता से उन्हें कुछ जरूरी सामान खरीदने और शादी की शुरुआती तैयारियां करने में थोड़ी राहत मिली है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि गरीब परिवार की बेटी की शादी पूरे गांव की जिम्मेदारी होती है। गांव के कई लोग भी अपने स्तर से मदद करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी भी इस परिवार को और सहायता की जरूरत है।
शादी की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, परिवार की चिंता भी बढ़ती जा रही है। परिवार के लोग चाहते हैं कि उनकी बेटी की विदाई सम्मान और इज्जत के साथ हो। हर माता-पिता का सपना होता है कि उनकी बेटी की शादी अच्छे तरीके से हो और उसे ससुराल विदा करते समय कोई कमी न रह जाए।
हालांकि इस परिवार के सामने हालात बेहद कठिन हैं, लेकिन उम्मीद अभी भी बाकी है। गांव के लोग और समाजसेवी चाहते हैं कि प्रशासन और समाज के सक्षम लोग इस परिवार की मदद के लिए आगे आएं। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं है, बल्कि यह उस हकीकत की भी याद दिलाती है कि समाज में आज भी कई ऐसे परिवार हैं, जिन तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाया है।
जरूरत है कि ऐसे परिवारों को चिन्हित कर उन्हें समय पर सहायता दी जाए, ताकि उनकी जिंदगी थोड़ी आसान हो सके। धोतियाहवां गांव की यह बेटी आज अपने पिता की कब्र के साए में खड़ी होकर अपनी शादी का इंतजार कर रही है।
उम्मीद यही है कि समाज की संवेदनशीलता और लोगों की मदद से उसकी विदाई सम्मान के साथ हो सकेगी और उसके जीवन की नई शुरुआत खुशियों के साथ हो पाएगी।


















