रायबरेली। एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रही गर्भवती महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है। जनपद के फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) ऊंचाहार में अब फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज़ (एफसीएम) इंजेक्शन की सुविधा शुरू कर दी गई है।
एनीमिया दिवस के अवसर पर इस नई पहल की शुरुआत करते हुए गंभीर एनीमिया से ग्रसित दो गर्भवती महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन लगाया गया।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज शुक्ला ने बताया कि यह पहल मध्यम और गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं के बेहतर उपचार के लिए शुरू की गई है। एफसीएम इंजेक्शन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी केवल एक डोज से ही हीमोग्लोबिन स्तर में तेजी से सुधार संभव होता है।
उन्होंने बताया कि पहले एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं को आयरन सुक्रोज के पांच इंजेक्शन लगवाने पड़ते थे, जिसके लिए बार-बार अस्पताल आना पड़ता था।
कई महिलाएं नियमित रूप से नहीं आ पाती थीं, जिससे उपचार अधूरा रह जाता था। अब इस नई सुविधा से उन्हें बार-बार अस्पताल आने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उपचार अधिक प्रभावी होगा।
इस अवसर पर गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, आयरन युक्त भोजन और नियमित एएनसी (एंटिनेटल केयर) जांच के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के प्रभावी प्रबंधन के लिए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऊंचाहार के अलावा डलमऊ, लालगंज, बछरावां और सलोन एफआरयू में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि रायबरेली में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है। इसके तहत केजीएमयू और यूपीटीएसयू की टीम द्वारा चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि उपचार की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस पहल से गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को तेजी से दूर करने में मदद मिलेगी, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।


















