आर स्टीफ़न
मनेंद्रगढ़ (छत्तीसगढ़)। जिले में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा मंगलवार को वन मंडल अधिकारी (DFO) की कथित मनमानी और कार्यशैली के विरोध में विशाल रैली-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी कर डीएफओ को हटाने की मांग उठाई और संबंधित विभाग को ज्ञापन भी सौंपा।
कांग्रेसजनों ने बैगा जनजाति के प्रभावित परिवारों के घर तोड़ने में शामिल वन कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई, जंगलों में अवैध कटान और लकड़ी तस्करी की जांच, आबादी वाले क्षेत्रों में घूम रहे वन्यजीवों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ने तथा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच जैसी मांगें उठाईं।
भरतपुर के पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने प्रदर्शनस्थल पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि डीएफओ की कार्यशैली से गरीबों और जनजातीय समुदाय का शोषण हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि शासन इस पूरे मामले में चुप क्यों है और स्थानीय जनसमस्याओं पर संज्ञान क्यों नहीं लिया जा रहा। पूर्व विधायक ने क्षेत्रीय विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जैसवाल को भी कटघरे में खड़ा करते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग की।
रैली को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और वन विभाग ने शहर के विभिन्न हिस्सों में बैरिकेडिंग की, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नोकझोंक के बाद अवरोध पार करते हुए रैली जारी रखी। बैरिकेडिंग के कारण कुछ समय के लिए मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रही, जिससे स्कूली बच्चों, अभिभावकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इधर सूत्रों के अनुसार हाल ही में डीएफओ मनीष कश्यप को नई दिल्ली में “महुआ बचाओ अभियान” के लिए नेक्स्ट ऑफ गुड फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अनिल स्वरूप और पद्मश्री से सम्मानित सेवानिवृत्त IPS अधिकारी प्रकाश सिंह ने प्रदान किया था। सम्मान और विरोध- दोनों के बीच यह विरोधाभास स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि शिकायतों का समाधान शीघ्र नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


















