रायबरेली की राष्ट्रीय लोक अदालत में 1.94 लाख मामलों का निस्तारण

रायबरेली। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार शनिवार को जनपद न्यायालय रायबरेली में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम जनपद न्यायाधीश अमित पाल सिंह की अध्यक्षता तथा प्रशासनिक न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस लोक अदालत में कुल 1,94,393 वादों का निस्तारण किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रशासनिक न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं देवी सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था में वादकारियों का हित सर्वोच्च होता है। लोक अदालत का उद्देश्य आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण कर आमजन को सुलभ और सरल न्याय उपलब्ध कराना है।

इस अवसर पर जिला जज अमित पाल सिंह, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय भूपेन्द्र राय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के चेयरमैन प्रफुल्ल कमल, अपर प्रधान न्यायाधीश चन्द्रमणि मिश्रा, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी अनिल कुमार (पंचम), प्रथम अपर जनपद न्यायाधीश कुशल पाल, अपर जिला जज एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी अमित कुमार पाण्डेय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पवन कुमार सिंह सहित अन्य न्यायिक अधिकारी एवं विभिन्न बैंकों के अधिकारी उपस्थित रहे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अमोद कंठ ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में एक लाख चौरानवे हजार तीन सौ तिरानवे मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में हुए समझौतों की कुल धनराशि 15 करोड़ रुपये से अधिक रही।

उन्होंने बताया कि लोक अदालत में बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से जुड़े प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निस्तारण कराया गया तथा मौके पर ही समझौते कराए गए। इसके अलावा बड़ी संख्या में ई-चालान, चेक बाउंस (एनआई एक्ट) और वैवाहिक विवाद से जुड़े मामलों का भी समाधान किया गया। कई ऐसे दंपतियों के बीच भी सुलह-समझौता कराया गया जो तलाक के कगार पर पहुंच चुके थे।

राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जिला कारागार रायबरेली में बंद बंदियों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी दीवानी न्यायालय परिसर में लगाई गई। साथ ही उद्योग विभाग द्वारा एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत भी प्रदर्शनी आयोजित की गई।

आमजन की सुविधा के लिए न्यायालय परिसर में कई स्थानों पर सहायता पटल और हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए, जिससे लोगों को जानकारी और मार्गदर्शन आसानी से उपलब्ध हो सके।

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