– “घुड़दौड़ परंपरा, अनुशासन और उत्कृष्टता का प्रतीक”-डॉ. राजेश्वर सिंह
शकील अहमद
लखनऊ। लखनऊ रेस एंड टर्फ क्लब में आयोजित ‘अर्जुन कप – द मैजेस्टिक हॉर्स रेस’ का आयोजन खेल भावना, परंपरा और रोमांच के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने विजेता एवं प्रतिभागी घुड़सवारों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और खेल भावना के लिए सम्मानित किया।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि घुड़दौड़ मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित खेलों में से एक है, जो परंपरा, अनुशासन और उत्कृष्टता का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि लखनऊ रेस एंड टर्फ क्लब, वर्ष 1860 में पंजीकृत और 1891 में औपचारिक रूप से स्थापित, भारत की घुड़दौड़ विरासत का एक जीवंत प्रतीक है।
भारत की खेल विरासत का बेजोड़ केंद्र
डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि लगभग 70.22 एकड़ क्षेत्रफल में फैला यह ऐतिहासिक रेसकोर्स भारत के सबसे लंबे अंडाकार रेस ट्रैक (3,200 मीटर) का गौरव रखता है, जो एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में संचालित होता है। उन्होंने कहा कि टोंगा और जिमखाना रेस से लेकर थरब्रेड रेसिंग और पोलो तक, यह परिसर भारतीय खेल संस्कृति का सजीव दस्तावेज है।
‘सेक्रेटेरिएट’ की विरासत आज भी प्रेरणा
अंतरराष्ट्रीय घुड़दौड़ के उदाहरण देते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि Secretariat जैसे महान घोड़े केवल जीत के लिए नहीं, बल्कि खेल में प्रभुत्व की परिभाषा बदलने के लिए याद किए जाते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 1973 के Belmont Stakes में Secretariat द्वारा अंतिम चरण में गति बढ़ाकर negative splits के साथ दौड़ पूरी करना और 50 वर्षों बाद भी Triple Crown के रिकॉर्ड का कायम रहना, यह साबित करता है कि सच्ची महानता समय की सीमाओं से परे होती है।
आयोजकों की सराहना
डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस भव्य आयोजन के लिए आयोजक शरद चौधरी एवं करन चंद्रा के प्रयासों की सराहना की। साथ ही मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुमार सहित सभी विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन खेल संस्कृति को नई दिशा और वैश्विक पहचान प्रदान करते हैं।


















