इंसानियत की मिसाल: पिता की 9वीं पुण्यतिथि पर जुबैर खान ने 500 से अधिक जरूरतमंदों को ओढ़ाई ‘राहत की चादर’

रायबरेली (ऊंचाहार)। कड़ाके की ठंड और हाड़ कंपा देने वाली शीतलहर के बीच रायबरेली जनपद के ऊंचाहार क्षेत्र स्थित सवैया हसन गांव में इंसानियत की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। पत्रकार एवं समाजसेवी जुबैर खान ने अपने पिता की 9वीं पुण्यतिथि को केवल धार्मिक रस्म तक सीमित न रखते हुए उसे सेवा, संवेदना और मानवता के रूप में मनाया। इस अवसर पर आयोजित विशाल कम्बल वितरण कार्यक्रम में 500 से अधिक जरूरतमंदों को ठंड से राहत प्रदान की गई।

शुक्रवार को जुबैर खान के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में सुबह से ही जरूरतमंद लोगों की भीड़ जुटने लगी। कड़ाके की ठंड के बीच जब गरीब, असहाय और बुजुर्ग लोग कांपते हाथों से कम्बल ग्रहण कर रहे थे, तो हर चेहरे पर राहत और संतोष की झलक साफ दिखाई दे रही थी। गांव सवैया हसन उस दिन केवल एक आयोजन स्थल नहीं, बल्कि इंसानियत और करुणा का केंद्र बन गया।

मदरसा छात्रों और गरीबों का बना सहारा

जुबैर खान की यह पहल केवल गांव के लोगों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने गांव स्थित मदरसा नईमिया में अध्ययनरत उन छात्रों की भी सुध ली, जो दूर-दराज के क्षेत्रों से तालीम हासिल करने के लिए यहां रह रहे हैं। घर-परिवार से दूर, सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई कर रहे इन तालिबे-इल्मों को जब अपने हाथों से जुबैर खान ने गर्म कम्बल ओढ़ाए, तो उनके चेहरों पर सुकून और सम्मान की मुस्कान देखने लायक थी।

इसके साथ ही कार्यक्रम में क्षेत्र की गरीब, असहाय, दिव्यांग और विधवा महिलाओं को प्राथमिकता दी गई। जरूरत के अनुसार सभी को कम्बल वितरित किए गए। कुल मिलाकर 500 से अधिक कम्बलों का वितरण कर जुबैर खान ने ठंड के इस कठिन दौर में समाज के कमजोर वर्गों के लिए बड़ी राहत सुनिश्चित की।

रगों में है समाज सेवा का जुनून

जुबैर खान केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय समाजसेवी के रूप में भी पहचाने जाते हैं। वे पूर्व में अपनी ग्राम सभा से प्रधान पद का चुनाव भी लड़ चुके हैं और क्षेत्र की समस्याओं से भली-भांति परिचित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सेवा कार्य कोई दिखावा या चुनावी स्टंट नहीं, बल्कि जुबैर खान का वर्षों पुराना संकल्प है।

ग्रामीणों के अनुसार जुबैर खान हर वर्ष ठंड के मौसम में जरूरतमंदों के लिए कम्बल वितरण करते हैं। इसके अलावा वे चुपचाप गरीब परिवारों की आर्थिक सहायता, राशन सामग्री और इलाज में भी मदद करते रहते हैं। कई जरूरतमंद परिवारों के लिए वे उस समय सहारा बनते हैं, जब कोई और साथ नहीं देता।

समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने की सराहना

इस पुनीत अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक, समाजसेवी और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि जुबैर खान का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि जब लोग अपने निजी आयोजनों को सेवा से जोड़ते हैं, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।

कार्यक्रम में शिव प्रकाश साहू, रामफल साहू, प्रकाश अवस्थी, वसीम खान, सूबेदार खान, अब्दुल सत्तार खान, कामता प्रसाद मौर्य, केसर लाल मौर्य, राम अभिलेख मौर्य, राजेंद्र बहादुर सिंह, डॉ. इंद्रपाल मौर्य और पूर्व प्रधान छोटेलाल मौर्य सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। सभी ने जुबैर खान के इस मानवीय कार्य की खुले दिल से सराहना की।

सच्ची श्रद्धांजलि की मिसाल

अपने संक्षिप्त संबोधन में जुबैर खान ने कहा कि उनके पिता ने हमेशा इंसानियत और दूसरों की मदद करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि “सच्ची श्रद्धांजलि किसी तस्वीर पर फूल चढ़ाने में नहीं, बल्कि किसी ठिठुरते इंसान को गर्म कपड़ा ओढ़ाने में है।”

जुबैर खान का यह आयोजन यह साबित करता है कि यदि नीयत साफ हो, तो व्यक्तिगत दुख को भी समाज की सेवा में बदला जा सकता है। सवैया हसन गांव में उस दिन न केवल कम्बल बंटे, बल्कि दुआएं, सम्मान और इंसानियत की गर्माहट भी हर दिल तक पहुंची।

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