महराजगंज में भीषण ठंड के बीच खेतों की रखवाली को मजबूर किसान, छुट्टा पशुओं से फसलें तबाह

  • रातभर टॉर्च और डंडा लेकर जाग रहे अन्नदाता, प्रशासनिक कार्रवाई बेअसर होने का आरोप

सैराभ जायसवाल

बृजमनगंज (महराजगंज)। भीषण ठंड के बावजूद बृजमनगंज क्षेत्र के किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए रात-दिन खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। छुट्टा पशुओं और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक ने किसानों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। दिन ढलते ही जंगलों से निकलकर पशुओं के झुंड खेतों में घुस जाते हैं और मेहनत से खड़ी फसलों को चंद घंटों में चौपट कर देते हैं।

इस समय क्षेत्र के खेतों में गेहूं, आलू, सरसों, मटर सहित अन्य रबी फसलें लहलहा रही हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि दर्जनों की संख्या में आने वाले पशुओं के झुंड फसलों को बर्बाद कर चले जाते हैं। छुट्टा पशुओं को पकड़कर गौ-आश्रय स्थलों में भेजने के सरकारी निर्देश जमीनी स्तर पर बेअसर दिखाई दे रहे हैं।

इन गांवों में सबसे ज्यादा परेशानी

बृजमनगंज ब्लॉक के नयनसर ग्रामसभा अंतर्गत सोनौली, हरसहायपुर, हाजीजोत, भगतपुरवा, खुर्रमपुर, भरतपुर, रमजानपुर, टीकुर, बिहारीपुर, सूर्यमानपुर, महुलानी, चौरी, रामदयालपुर समेत कई गांवों में छुट्टा पशुओं और जंगली जानवरों का आतंक लगातार बना हुआ है।

किसानों ने खेतों के चारों ओर लोहे के तारों से बैरिकेडिंग कर रखी है। कुछ किसानों ने तो झटका मशीन भी लगाई है ताकि आवारा पशु खेत में प्रवेश न कर सकें, लेकिन जब पशुओं का झुंड आता है तो तारों को तोड़ता हुआ खेतों में घुस जाता है। ऐसे में किसान एक हाथ में टॉर्च और दूसरे में डंडा लेकर रातभर खेतों में चौकन्ने रहते हैं।

किसानों का आरोप-न शासन सुन रहा, न जनप्रतिनिधि

किसानों का कहना है कि इस गंभीर समस्या से प्रशासन और जनप्रतिनिधि अनजान बने हुए हैं। न तो रात में पहरा दे रहे किसानों की सुध ली जा रही है और न ही स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रशासन का पक्ष

इस संबंध में बीडीओ कृष्णकांत शुक्ला ने बताया कि बृजमनगंज ब्लॉक के पिपरा परसौनी में एक गौ-आश्रय केंद्र स्थापित है, जहां वर्तमान में 80 से अधिक पशु रखे गए हैं। यदि क्षेत्र में कहीं छुट्टा पशु घूमते पाए जाते हैं, तो उन्हें पकड़वाकर गौ-आश्रय केंद्र भेजवाया जाएगा।
किसानों ने मांग की है कि छुट्टा पशुओं की नियमित पकड़, गौ-आश्रय केंद्रों की क्षमता बढ़ाने और रात्रि गश्त जैसी ठोस व्यवस्थाएं तत्काल लागू की जाएं, ताकि उनकी फसल और मेहनत सुरक्षित रह सके।

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