- हाइवे पर जगह जगह खुदे है गड्ढे, फैली है मिट्टी एवं गिट्टी , उड़ रहा धूल
- मानकों को ताख़ पर किया जा रहा है हाइवे निर्माण कार्य
- ट्रैफिक पुलिस, स्थानिक पुलिस भीषण ट्रैफिक जाम को छुड़ाने में त्रस्त , हाइवे निर्माण कर्मचारी मस्त
शकील अहमद
लखनऊ। लखनऊ–कानपुर हाईवे पर निर्माण कार्य की सुस्त और अव्यवस्थित कार्यशैली के कारण आए दिन भीषण जाम लगता है और दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं। हाईवे निर्माण कार्य में लगे पीएनसी कंपनी के कर्मचारियों की लापरवाहियों से यात्रियों और स्थानीय लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
हाईवे के कई हिस्सों पर गड्ढे खुले पड़े हैं, मिट्टी और गिट्टी सड़कों पर बिखरी रहती है, जिससे धूल का गुबार यात्रियों और स्थानीय कारोबारियों के लिए गंभीर समस्या बन चुका है। निर्माण मानकों की अनदेखी के बीच कहीं आधा निर्माण छोड़ दिया जाता है तो कहीं अचानक बीच सड़क पर खोदाई शुरू कर दी जाती है। कई स्थानों पर अस्थायी डाइवर्जन बनाकर छोड़ दिया गया है, पर वहां आवश्यक सुरक्षा प्रबंध तक नहीं हैं। स्थिति यह है कि हाईवे पर ट्रैफिक को नियंत्रित करने वाले किसी मार्शल का भी प्रायः पता नहीं चलता।
स्थानीय लोगों के अनुसार अवध चौराहा से लेकर जुनाबगंज तिराहा, कटी बगिया तक हर रोज़ भारी ट्रैफिक जाम लगना आम बात हो चुकी है। ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस जाम छुड़ाने में पसीने-पसीने हो जाती है, जबकि निर्माण कार्य में लगे कर्मचारी पूरी तरह बेफिक्र नजर आते हैं।
करीब दो वर्षों से चल रहे निर्माण के दौरान कई लोग दुर्घटनाओं का शिकार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। हाईवे के किनारे नालों का निर्माण भी रामभरोसे चल रहा है। शिकायतों के बावजूद पीएनसी कंपनी और नेशनल हाईवे निर्माण से जुड़े जिम्मेदारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। प्रशासन के कड़े निर्देशों के बाद कुछ दिन कार्य सही तरीका अपनाकर किया जाता है, फिर पहले जैसी स्थिति वापस शुरू हो जाती है।
हाईवे की जर्जर और अव्यवस्थित स्थिति खासतौर पर नदरगंज, स्कूटर इंडिया चौराहा, बंथरा, जुनाबगंज, कटी बगिया और बनी पुल तक साफ देखी जा सकती है। स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि जब निर्माण कार्य से जनता को इतनी परेशानी हो रही है तो आखिर कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।
अब यह देखना होगा कि केंद्र और प्रदेश सरकार ऐसे ठेकेदारों की मनमानी पर लगाम लगा पाएगी या फिर आम जनता को इसी तरह हाईवे निर्माण की अव्यवस्था का खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा।


















