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रायबरेली

जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर ओपी यादव का केंद्र सरकार पर हमला, राष्ट्रपति को भेजा मांग-पत्र

दिनांक: Tuesday, 21 July 2026 | समय: 06:39 PM | लेखक: | श्रेणी: रायबरेली
  • संसद की ओर कूच कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज को बताया लोकतंत्र पर काला धब्बा, प्रधानमंत्री को पद से हटाने की मांग
  • जंतर-मंतर आन्दोलन भाजपा सरकार के ताबूत में आखिरी कील – ओपी यादव

रायबरेली। सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व डीजीसी (फौजदारी) तथा समाजवादी नेता ओपी यादव ने कहा कि जंतर-मंतर, दिल्ली का छात्र आन्दोलन भाजपा सरकार के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। श्री यादव ने महामहिम राष्ट्रपति महोदय को फैक्स भेजकर देश के क्रूर व तानाशाह शासक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके पद से बर्खास्त करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि देश में 60 प्रतिशत से अधिक युवा हैं। युवा बेरोजगार हैं। सरकार उन्हें रोजगार के सपने दिखाकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी के चहेते शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के कार्यकाल के दौरान 89 बार पेपर लीक हो चुके हैं। 40 दिन में 20 छात्रों ने आत्महत्या कर ली है।

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उन्होंने कहा कि देश के युवा पहली बार अपने अधिकारों की मांग को लेकर एकजुटता का परिचय देते हुए एक माह से धरना देकर आन्दोलनरत हैं। दर्जनों छात्र धरना स्थल पर अनशन पर बैठे हैं। आमरण अनशन पर बैठे कई छात्रों को गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर धरना स्थल से जानवरों की तरह टांगकर संवेदनहीन दिल्ली पुलिस उठा ले गई। इसके बावजूद छात्रों के हौसले बुलंद हैं।

उन्होंने कहा कि “सितम भी सहना, दुआ भी देना, बेबसी का गया जमाना। हिम्मत हो तो गिराओ बिजली, बना रहा हूँ मैं आशियाना।”

श्री यादव ने कहा कि एक माह से धरना दे रहे छात्रों से जंतर-मंतर पर वार्ता करने कोई मंत्री नहीं पहुँचा और जब इस गूँगी-बहरी सरकार के विरुद्ध छात्रों ने धरना-स्थल से संसद की ओर कूच किया तो पूरी सड़क को छावनी में बदल दिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया तथा आँसू गैस के गोले छोड़े गए। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे ये देश के भावी कर्णधार न होकर देश के दुश्मन हों। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा किया गया बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज जलियांवाला बाग और 7 जनवरी 1921 के किसान आन्दोलन के मुंशीगंज गोलीकांड की याद दिलाता है, जब ब्रिटिश हुकूमत ने किसानों पर बेरहमी से गोलियाँ चलाकर उन्हें मौत की नींद सुला दिया था।

उन्होंने कहा कि “जुल्मी कब तक जुल्म करेगा सत्ता के हथियारों से, जर्रा-जर्रा गूंज रहा है परिवर्तन के नारों से।”
श्री यादव ने कहा कि छात्रों के आन्दोलन को समर्थन देने पहुँचे विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद, विधायक और कार्यकर्ताओं को भी सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

उन्होंने कहा “जिस जगह पर मैं खड़ा हूँ, वह मेरी पहचान है।
आप आंधी हैं, तो क्या हमें उड़ा ले जाएंगे। आप सिर्फ किरदार हैं, अपनी हदें पहचानिए, वरना एक दिन कहानी से निकाले जाओगे।”

उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा प्रदत्त भारतीय संविधान में सरकार की जनविरोधी नीतियों से असहमति जताने एवं अपने विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। अपनी मांगों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन करने की व्यवस्था है, परन्तु उनके अनुसार मनुवादी सोच के पोषक भाजपा सरकार के मंत्री संविधान को दरकिनार कर लोगों की जायज मांगों को लेकर किए जा रहे आन्दोलन को कुचलने के लिए लाठी का सहारा ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि “पीर पर्वत हो गई है, अब पिघलनी चाहिए।
फिर हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आग मेरे सीने में सही, तेरे सीने में सही, जहाँ कहीं आग हो, वो आग जलनी चाहिए।”

अंत में श्री यादव ने 20 जुलाई को सरकार द्वारा किए गए कथित अमानवीय व्यवहार को लोकतंत्र का काला धब्बा बताते हुए महामहिम राष्ट्रपति से केन्द्र सरकार को भंग करने की मांग की।

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