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रायबरेली

सोनम वांगचुक को बलपूर्वक उठाना अन्याय की पराकाष्ठा – ओपी यादव

दिनांक: Sunday, 19 July 2026 | समय: 04:49 AM | लेखक: | श्रेणी: रायबरेली
  • देश के करोड़ों युवकों की आवाज का केन्द्र बना जंतर-मंतर
  • 20 जुलाई को मांगों के समर्थन में संसद भवन का होगा घेराव

रायबरेली। सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ओपी यादव ने महामहिम राष्ट्रपति महोदय को फैक्स भेजकर मांग की है कि देश के करोड़ों युवकों की आवाज का केन्द्र बने जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे हैं। सोनम वांगचुक को बलपूर्वक उठाना अन्याय की पराकाष्ठा है। एैसी स्थिति में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को बर्खास्त करें।

सोनम वांगचुक के बारे में यह पंक्तियाँ चरितार्थ होती है कि –

‘‘लिख रहा हूँ मैं अंजाम कल आगाज आयेगा। मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लायेगा।’’

59 वर्षीय सोनम वांगचुक ने जलवायु परिवर्तन की दशा में बहुत कम कर चुके हैं। देश-विदेश में उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। जंतर-मंतर में कई लोग माँगों के समर्थन में अनशन कर रहे हैं, परन्तु सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।

एैसी स्थिति में मेरा अनुरोध है कि धरना दंे, अनशन करके अपना जीवन संकट में न डालें। 20 जुलाई को संसद भवन के घेराव में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करें।

‘‘बरसाओं मत आँशू ये मेरे माधुरे नयन इन बेबसी बूंदों की औकात रेगिस्तान क्या जाने।’’

इस गूँगी बहरी सरकार की संवेदनहीनता के कारण गंगा संरक्षण को लेकर इंजीनियर जी.डी. अग्रवाल 111 दिन आमरण अनशन के बाद शहीद हो गये, लेकिन सरकार ने उनकी नहीं सुनी। किसान आन्दोलन में 750 किसान शहीद हो गये, उन्हें श्रद्धाँजलि तक नहीं अर्पित की। धर्मेन्द्र प्रधान के कार्यकाल में 89 बार पेपर लीक हो चुके हैं, परन्तु सरकार उन्हें हटाने का नाम नहीं ले रही है। 40 दिनों के अन्दर 20 छात्रों की मौत हो चुकी है। दीपक नाम के एक छात्र की 16 दिन के आमरण अनशन के बाद हालत खराब हो गयी, जिसे अस्पताल ले जाया गया।

‘‘हवा के सामने सीना सिफर तो रहता है, मगर चराग है बुझने का डर तो रहता है’’

एक समय था जब 1984 में लद्दाख के आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल आमरण अनशन पर बैठे थे तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जाकर उनका अनशन तुड़वाया था और मांगे स्वीकार की थी। आज के प्रधानमंत्री की संवेदनहीनता से एैसी उम्मीद नहीं दिख रही है।

‘‘जेहनों में जंग है जारी, जिसका कोई एलान नहीं जिसको सारी दुनिया जाने उसकी कोई पहचान नहीं।’’

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