कुरासिया उपक्षेत्र में कंपनी आवासों की अवैध बिक्री, प्रबंधन की चुप्पी पर उठे सवाल

आर स्टीफ़न

चिरमिरी (छत्तीसगढ़)। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (SECL) के चिरमिरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुरासिया उपक्षेत्र में कंपनी आवासों की अवैध बिक्री का बड़ा मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, यह पूरा गोरखधंधा प्रबंधक की सहमति और मौन स्वीकृति से चल रहा है।

मीडिया द्वारा जब इस मुद्दे पर कुरासिया उपक्षेत्रीय प्रबंधक से जानकारी चाही गई तो उन्होंने जवाब देने से बचते हुए गोलमोल बातें कर गुमराह करने की कोशिश की।

क्या है पूरा मामला

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के कई आवासों को लाखों रुपये में बेचा जा रहा है, जबकि ये घर कंपनी की संपत्ति हैं और कर्मचारियों के लिए ही आवंटित किए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहरी लोगों ने इन आवासों पर कब्जा कर रखा है और अब इन्हें पैसे लेकर बेचने का काम खुलेआम चल रहा है।

कर्मचारियों का आरोप है कि “प्रबंधन सबकुछ जानता है, लेकिन अनदेखी कर रहा है। जो कर्मचारी सालों से कंपनी में सेवा दे रहे हैं, उन्हें जर्जर मकानों में रहना पड़ रहा है, जबकि बाहर के लोग कंपनी के मकान बेच रहे हैं।”

कर्मचारियों की नाराज़गी

कोल माइंस के कर्मचारी लंबे समय से पानी और बिजली की अनियमित आपूर्ति से परेशान हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वहीं दूसरी ओर, कंपनी की बिजली और पानी का उपयोग स्थानीय उद्योगों व दुकानों में किया जा रहा है, जिससे कंपनी को हर महीने लाखों का नुकसान हो रहा है।

फर्जी आवास भत्ता घोटाला भी उजागर

जानकारी के मुताबिक, कुछ राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारी, जो पहले से आवास भत्ता (HRA) प्राप्त कर रहे हैं, फिर भी SECL के आवासों में निवासरत हैं। ऐसे में वे सरकार को दोहरी आर्थिक हानि पहुँचा रहे हैं।

मुख्य बिंदु

1. कंपनी आवासों की अवैध बिक्री से चल रहा है लाखों का खेल।

2. मरम्मत के नाम पर फर्जी खर्च, कर्मचारियों को मिल रहे हैं जर्जर मकान।

3. बिजली-पानी की समस्या से त्रस्त कर्मचारी बार-बार शिकायत कर रहे हैं।

4. कंपनी संसाधनों से चल रहे हैं स्थानीय उद्योग और दुकानें।

5. फर्जी आवास भत्ता घोटाला, दोहरी कमाई करने वालों पर कार्रवाई की माँग।

6. प्रबंधन की चुप्पी पर कर्मचारियों और स्थानीय जनता में आक्रोश।

जाँच की माँग

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्मचारियों और स्थानीय संगठनों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की माँग की है। उनका कहना है कि यदि इस गोरखधंधे की समय रहते जाँच नहीं हुई, तो यह कंपनी और सरकार दोनों की साख पर प्रश्नचिह्न बन जाएगा।

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