रायबरेली। जनपद में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों और घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से बुधवार को सड़क सुरक्षा एवं जागरूकता संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय के सभागार में आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रत्येक विकास खंड से दो शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि सड़क सुरक्षा से संबंधित जानकारी ही दुर्घटनाओं से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। शिक्षकों को आदेशात्मक, चेतावनीात्मक एवं सूचनात्मक यातायात संकेतों के महत्व की जानकारी दी गई और बताया गया कि सड़क पर चलते समय इन संकेतों का पालन करने से दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई कि देश में प्रतिवर्ष लगभग 1,75,000 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हो रही हैं, जो अत्यंत चिंता का विषय है। इस संदर्भ में बताया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे विद्यालयों में गठित सड़क सुरक्षा क्लबों के माध्यम से बच्चों को जागरूक कर प्राप्त किया जा सकता है।
यातायात विभाग से अरिमर्दन सिंह ने प्रतिभागियों को यातायात चिन्हों का अर्थ समझाते हुए बताया कि किस प्रकार बच्चों, युवाओं और समुदाय को यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित कर दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है। वहीं अरविंद कुमार यादव ने सड़क सुरक्षा नियमों के साथ-साथ हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता पर विस्तृत जानकारी दी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल सिंह ने कहा कि मानवीय संसाधन की क्षति को न्यूनतम करने के लिए शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस प्रकार के प्रशिक्षण के माध्यम से समाज में व्यापक जागरूकता लाई जा सकती है।
प्रशिक्षक शिव शरण सिंह ने विद्यालय स्तर पर गठित होने वाले सड़क सुरक्षा क्लबों की संरचना, कार्य और दायित्वों की जानकारी दी। प्रशिक्षक सूर्य प्रकाश ने बताया कि विद्यालयों में बच्चों के परिवहन से संबंधित समितियों के माध्यम से बिना परमिट वाहनों को कैसे रोका जा सकता है।
इसके अतिरिक्त राजेश कुमार यादव ने रोड रेंज से संबंधित जानकारी दी, जबकि सुरेश सिंह ने प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर प्रकाश डाला।
















