स्वच्छता पुरस्कार के लिए कॉलेजों का चयन सवालों के घेरे में, मानकों की खुली अनदेखी!

हर ओर फैली गंदगी दे रही बीमारियों को दावत

खीरों, रायबरेली। स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए क्षेत्र के दो इंटर कॉलेज का चयन किया गया है। विवेकानंद बिहारी लाल इंटर कॉलेज कस्बे के पावर हाउस रोड पर स्थित है। चयनित दूसरा इंटर कॉलेज भीतर गांव के आनंदी देवी बाल विद्या मंदिर के नाम से है। इस नाम से कोई इंटर कालेज या विद्यालय नहीं चल रहा है। आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई है, यह जांच का विषय है।

स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए चयनित कस्बा स्थित विवेकानंद बिहारी लाल इंटर कॉलेज में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। शौचालय गंदे पड़े हैं। परिसर में इधर-उधर हर जगह गंदगी का अंबार है। नल की टोटियों के नीचे कई जमी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि मानक पूरे न करने और इतनी अव्यवस्था होने के बावजूद इंटर कॉलेज का चयन स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार के लिए आखिर कैसे कर लिया गया।

कॉलेज प्रांगण में बड़ी-बड़ी घास खड़ी है। कूड़े-कचरे के ढेर जगह-जगह पर लगे हैं। परिसर के अंदर की नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। बदबू उठने से बीमारियां फैलने का खतरा है। शौचालय में गंदगी का अंबार है। फर्श पर कई जमी है। किसी के भी फिसल कर गिरने का खतरा है। शौचालय उपयोग के लिए भरे पानी में मच्छर बजबजा रहे हैं।

हाथ धोने के लिए साबुन या हैंड वॉश का कहीं कोई प्रबंध नहीं है। पीने के लिए लगे आरो प्लांट की टोटियों में काई जमी हुई है। ऐसा लगता है कि मानो लंबे अरसे से उसकी सफाई नहीं की गई है।

सेटिंग से स्वच्छता पुरस्कार के लिए कराया चयन

कॉलेज के अंदर अव्यवस्थाओं का अंबार है। परिसर में हर कहीं गंदगी है। शौचालय से लेकर नल की टोटियों तक में काई जमी है। ऐसे में स्वच्छता पुरस्कार के लिए कॉलेज को नामित करना जिम्मेदारों की लापरवाही और मनमानी को दर्शाता है।

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