भारत में चांदी की कीमतों ने जनवरी 2026 में ऐतिहासिक स्तर छू लिया है। पहली बार घरेलू बाजार में चांदी ₹4,00,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। बीते एक साल से जारी तेजी का रुझान नए साल के पहले महीने में भी बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, हैदराबाद में चांदी का भाव ₹4 लाख प्रति किलो दर्ज किया गया। केवल 28 दिनों में कीमत ₹1,44,000 प्रति किलो बढ़ी, जिसे असाधारण उछाल माना जा रहा है। वायदा बाजार की बात करें तो MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी ₹3,79,300 प्रति किलो पर कारोबार कर रही है, जो करीब 5.62% की तेजी दर्शाता है।
तेजी के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों में इस उछाल के पीछे कई संरचनात्मक और वैश्विक कारक हैं-
- तेज़ औद्योगिक मांग: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और 5G जैसे सेक्टरों में चांदी का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है। ये क्षेत्र मिलकर चांदी की कुल मांग का 50% से अधिक हिस्सा ले रहे हैं।
- सेफ-हेवन निवेश: भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर डॉलर और महंगाई के दबाव के चलते निवेशक चांदी को सुरक्षित विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
- सीमित सप्लाई: चांदी का उत्पादन सीमित है और खनन लागत बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार COMEX पर चांदी लगभग $113 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है और $115 से ऊपर जाने की संभावना जताई जा रही है।
- 2026 में अब तक तेज उछाल: वर्ष 2026 की शुरुआत से ही चांदी में 40–50% तक की तेजी देखी जा चुकी है।
खरीदारों और व्यापारियों पर असर
- चांदी की रिकॉर्ड कीमतों का सीधा असर उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर भी पड़ रहा है।
- सिक्के, बार या आभूषण खरीदने वालों के लिए चांदी फिलहाल महंगी हो गई है।
- शादी-त्योहार और निवेश से जुड़ी खरीदारी का बजट बढ़ा है।
- ज्वेलर्स और चांदी व्यापारियों के अनुसार, ऊंचे दामों के कारण ग्राहकों की संख्या में कमी देखी जा रही है।
- वहीं, जिन निवेशकों या परिवारों के पास पहले से चांदी मौजूद है, उनकी संपत्ति के मूल्य में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सोलर, EV और AI सेक्टरों की मांग बनी रहती है, तो चांदी की कीमतें ₹4.5 लाख प्रति किलो तक जा सकती हैं। हालांकि, वैश्विक मंदी या तेज मुनाफावसूली की स्थिति में कीमतों में कुछ गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, चांदी फिलहाल मजबूत रुझान में बनी हुई है, लेकिन आगे उतार-चढ़ाव संभव है।


















