लालगंज सीएचसी की ब्लड स्टोरेज यूनिट ने बचाई प्रसूता की जान, समय पर मिला जीवनरक्षक रक्त

रायबरेली। जनपद में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में ब्लड स्टोरेज यूनिट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसी क्रम में लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) स्थित ब्लड स्टोरेज यूनिट के माध्यम से बृहस्पतिवार को एक प्रसूता को समय पर रक्त उपलब्ध कराकर उसकी जान बचाई गई।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि श्रीमती सुमन निवासी लालगंज का प्रसव होने के दो दिन बाद जब उसका हीमोग्लोबिन परीक्षण किया गया तो उसका स्तर मात्र सात ग्राम प्रति डेसीलीटर पाया गया। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल रक्त चढ़ाने का निर्णय लिया।

आवश्यक रक्त की व्यवस्था सीएचसी लालगंज पर संचालित ब्लड स्टोरेज यूनिट के माध्यम से की गई, जिससे प्रसूता को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिल सका।

उन्होंने बताया कि लालगंज एफआरयू में पिछले सप्ताह विद्युत आपूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्या उत्पन्न होने के कारण ब्लड स्टोरेज यूनिट का संचालन अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था। बृहस्पतिवार को विद्युत समस्या का समाधान कर यूनिट का संचालन पुनः शुरू कर दिया गया है, जिससे अब मरीजों को निर्बाध रूप से रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है।

एफआरयू स्थित ब्लड स्टोरेज यूनिट में सामान्यतः सभी चार रक्त समूहों का पर्याप्त मात्रा में रक्त उपलब्ध रहता है। इसके लिए सीएचसी पर नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। मरीज को रक्त चढ़ाने से पूर्व क्रॉस मैचिंग एवं रक्त की सभी आवश्यक जांच सुनिश्चित की जाती है। साथ ही जिला स्थित मदर ब्लड बैंक से प्राप्त रक्त की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसकी पुनः जांच भी की जाती है।

डॉ. चंद्रा ने बताया कि गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान और प्रसव के बाद गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। इसका प्रभाव गर्भस्थ शिशु एवं नवजात के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है और कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए जनपद में सीएचसी बछरावां, लालगंज एवं ऊँचाहार स्थित तीनों एफआरयू पर ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित की गई हैं, ताकि जरूरतमंद महिलाओं को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सके और मातृ मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, एनीमिया की समय पर पहचान एवं उपचार के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

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