लखनऊ। विश्व मृदा दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से खेतों की मिट्टी का स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए नियमित मृदा परीक्षण कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी न केवल फसल उत्पादन से जुड़ी है, बल्कि मानव स्वास्थ्य, प्रकृति और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है।
कृषि मंत्री शाही ने कहा कि मिट्टी की गुणवत्ता सीधे हमारे भोजन की गुणवत्ता निर्धारित करती है। उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी अपनी प्राकृतिक उर्वरता खो देती है। ऐसे में मृदा परीक्षण से यह स्पष्ट हो जाता है कि खेत को वास्तव में किन पोषक तत्वों की आवश्यकता है। इससे किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों को उपजाऊ जमीन भी मिल सकेगी।
उन्होंने किसानों से फसल चक्र (Crop Rotation), संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खाद अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यह उपाय मिट्टी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
राज्यभर में जागरूकता कार्यक्रम
विश्व मृदा दिवस पर पूरे प्रदेश में मृदा स्वास्थ्य सुधार के विषय पर किसान वैज्ञानिक संवाद एवं राज्य स्तरीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। मृदा परीक्षण की प्रक्रिया और समेकित पोषण प्रबंधन के महत्व को लेकर विभाग विभिन्न मॉडल भी प्रदर्शित करेगा।
कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु:
• कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों में छात्र प्रस्तुति
• मृदा उर्वरता बनाए रखने के लिए मॉडल विकास
• किसानों को मृदा परीक्षण के लाइव डेमो के माध्यम से प्रशिक्षण
• कृषि प्रयोगशालाओं में परीक्षण सुविधाओं की जानकारी
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 89 कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों में किसानों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लखनऊ स्थित कृषि निदेशालय में मृदा स्वास्थ्य एवं प्रबंधन पर विशेष कार्यशाला भी संपन्न हो रही है।
मृदा परीक्षण क्यों जरूरी?
मिट्टी में पोषक तत्वों का सही संतुलन पता चलता है
उर्वरक की बर्बादी रुकती है, लागत घटती है
फसल का उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ती है
प्राकृतिक उर्वरता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है
“स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ धरती की गारंटी है। प्रत्येक किसान अपने खेत की मिट्टी का नियमित परीक्षण कराए और उर्वरकों का उपयोग संतुलित रूप से करे।”- सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री उत्तर प्रदेश


















